हवा महल की धुलाई फ़ायर ब्रिगेड से

धुलने के बाद हवा महल
Image caption धुलाई के बाद हवा महल का रंग कुछ जगहों से उड़ गया है

जयपुर के मशहूर स्मारक हवा महल को धोने की कोशिश में कुछ जगहों पर उसका गुलाबी रंग उतर गया है.

अधिकारियों ने फ़ायर ब्रिगेड के काम आने वाले पानी के पाइपों से फव्वारे छोड़कर हवा महल की धूल छुड़ाने की कोशिश की थी जिससे कई जगहों पर उसका रंग निकल गया है.

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि 1799 में बनाई गई इस ख़ूबसूरत इमारत को कोई स्थाई नुक़सान नहीं पहुँचा है.

हवा महल को जयपुर शहर में कल यानी शनिवार से होने वाले प्रवासी भारतीयों के सम्मेलन के लिए साफ़ किया गया था.

राज्य की पर्यटन मंत्री बीना काक ने मीडिया को बताया कि हवा महल को पानी की धार डालकर धोया गया था लेकिन ये धारें इतनी तेज़ नहीं थीं कि कोई नुक़सान हो.

लेकिन बीबीसी हिंदी ने जब उनसे संपर्क किया तो बीना काक ने कहा, "आप मेरी प्रमुख सचिव उषा शर्मा से बात करें. आप उनसे बात करें जिन्होंने ये काम किया है."

विवाद

प्रमुख सचिव उषा शर्मा ने हवा महल को किसी भी तरह के नुक़सान की बात से इनकार किया है.

उन्होंने कहा, "हवा महल को कोई नुक़सान नहीं हुआ है. वो वैसा ही है जैसा पहले था."

कल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शहर का जायज़ा

लिया और अधिकारियों को कई निर्देश दिए.

हवा महल पर जमी धूल को जल्दी से हटाने के लिए अधिकारियों ने फ़ायर ब्रिगेड की गाड़ी से पानी फेंकने का फ़ैसला किया.

इसके बाद बवाल खड़ा हो गया. मीडिया में ख़बरें छपीं कि हवा महल की इमारत को नुक़सान पहुँच गया है.

ऐतिहासिक धरोहर

लेकिन जयपुर की कई इमारतों में क्यूरेटर रह चुकीं चंद्रमणि ने हवा महल पहुँचकर बीबीसी को बताया कि इमारत सुरक्षित है और दूर से देखने पर धुली हुई दिखती है.

जयपुर के ही एक और वास्तुविद रवि गुप्ता ने बीबीसी को बताया कि इमारत को कोई स्थाई नुक़सान नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा, "पानी की जेट बौछारें फेंकने से इमारत का गुलाबी रंग कुछ जगहों से उतर गया है. लेकिन इसे दुरस्त किया जा सकता है. इमारत के ढाँचे को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा."

रवि गुप्ता ने हालाँकि कहा कि ऐतिहासिक इमारतों को चमकाने और उन्हें नया दिखाने की कोशिश ग़लत है.

उन्होंने कहा, "ये ढाई तीन सौ साल पुरानी इमारतें हैं. इनसे छेड़छाड़ क्यों की जाए. पानी का प्रेशर मारने से प्लास्टर गिर सकता था. ऐसा हुआ नहीं है पर हो सकता था. "

रवि गुप्ता ने कहा कि अगर इमारत की सफ़ाई की बहुत ज़रूरत थी तो कपड़े से इसे पोंछा जा सकता था.

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