इतिहास के पन्नों में सात जनवरी

अगर इतिहास के पन्ने को पलट कर देखें तो भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी आज के दिन ही हुई थी और विश्व प्रसिद्ध पीसा की झुकी मीनार को दर्शकों के लिए बंद कर दिया गया था.

1980: इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी

Image caption इंदिरा गांधी भारत की सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्रियों में से एक गिनी जाती हैं.

आपातकाल के चलते सत्ता से उखाड़ फेंकने के तीन साल से कम अवधि के बाद ही भारत की जनता ने एक बार फिर से देश की बागडोर इंदिरा गांधी के हाथों सौंप दी.

भारत में केंद्र में जनता पार्टी की सरकार का प्रयोग सफ़ल नहीं रहा और देश के कई राजनीतिक दलों के विलय से बनी जनता पार्टी के नेताओं के कलह से जनता परेशान हो उठी जिससे इंदिरा गांधी की वापसी का रास्ता साफ़ हो गया.

जब आख़िरी मत की गिनती की घोषणा हुई तो इंदिरा कांग्रेस को 351 सीटें हासिल हुई थीं. पार्टी ने लोकसभा की कुल 525 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे.

इस चुनाव में इंदिरा कांग्रेस के दो मुख्य विरोधी राजनीतिक दल, जनता पार्टी और लोक दल को इतनी सीटें भी हासिल नहीं हुई कि उन्हें राष्ट्रीय दल का दर्जा हासिल हो पाता.

चुनाव में इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी को भी उनकी सीट से जीत हासिल हुई. संजय गांधी को आपातकाल के दौरान हुई बहुत सारी ज़्यादतियों के लिए ज़िम्मेदार बताया गया था.

चुनाव प्रचार

तिरसठ दिनों के चुनाव प्रचार के दौरान, 62 साल की इंदिरा गांधी के एक दिन में बीस-बीस भाषण दिए थे और कुल चालीस हज़ार किलोमीटर का दौरा किया था.

उन्हें 1978 में लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था. उनपर अब भी सत्ता के दुरूपयोग को लेकर जांच जारी है हालांकि कहा जा रहा है कि अब इस मामले को टाल दिया जाएगा.

जनता पार्टी में आपसी कलह और पार्टी के दो फ़ाड़ को इंदिरा गांधी की जीत का मुख्य कारण बताया जा रहा है.

जैसे ही इंदिरा गांधी की जीत की घोषणा हुई उनके सैकड़ो समर्थक रंगीन झंडे और बैनर लेकर उनके निवास स्थान के सामने इकट्ठे हो गए.

1990: पीसा की झुकती मीनार में दर्शकों का प्रवेश बंद

Image caption पिसा की झुकी मीनार को बंद करने का असर पर्यटन पर भी हुआ.

पिछले 800 सालों में पहली बार पीसा की झुकती हुई मीनार को दर्शकों के लिए इस आशंका के बीच बंद कर दिया गया है कि वो कभी भी गिर सकता है.

पिछले 100 सालों के भीतर टावर के शिखर पर स्थित घंटाघर 9.6 इंच खिसक गया है.

टावर का झुकाव भी हर साल लगभग दो मिली मीटर बढ़ रहा है. इसका मुख्य कारण है कि टावर के दक्षिणी ओर की ज़मीन उत्तरी तरफ़ से ज़्यादा मुलायम है.

इटली की सरकार ने इसके संरक्षण के लिए 4.7 करोड़ की राशि का एक फंड बनाया है और अंतरराष्ट्रीय जानकारों की एक टीम को दावत दी है कि वो आकर संरक्षण के लिए एक योजना तैयार करें.

तेरहवी सदी में निर्मित स्मारक को बनने में 200 साल का समय लग था. उसे देखने के लिए हर साल 10 लाख लोग आते थे जिनमें से कई टावर के ऊपर जाकर पिसा का नज़ारा देखने का आनंद उठाता है.

स्मारक के बंद होने का असर पर्यटन पर पड़ने की बात कही जा रही है.

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