नक्सली डर: यात्री ट्रेन ठप, माल ढुलाई जारी

Image caption बस्तर के कई इलाकों में आवागमन के साधन नहीं हैं

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का इलाक़ा वैसे तो काफ़ी संवेदनशील है और यहाँ आवागमन के संसाधन भी सीमित ही हैं. सड़क मार्ग से चलने पर तो लोगों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ ही रहा था मगर अब इस इलाक़े से होकर गुज़रने वाली एकमात्र यात्री ट्रेन भी बंद कर दी गई है.

रेलवे अधिकारी कहते हैं कि ऐसा नक्सली हिंसा की वजह से किया गया है मगर बस्तर के लोग इसे अपने इलाक़े की उपेक्षा कहते हैं. बस्तर के लोग इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं.

टूटी हुई सड़कें, ध्वस्त इमारतें और जंगलों की लंबी श्रृंखला से युक्त बस्तर संभाग भारत का वह इलाक़ा है जहाँ विकास की रोशनी पहुँच नहीं पाई है.

इस संभाग के कई इलाक़े आज भी ऐसे हैं जहाँ पहुँचना बेहद मुश्किल है. कई सड़कें इसलिए नहीं बन पाईं क्योंकि इन्हें बनाने वाले नक्सलियों के ख़ौफ़ की दुहाई देते हुए अपना काम समेटकर चलते बने.

कई सड़कें ऐसीं हैं जिन्हें मोवाई छापामारों ने जगह-जगह पर काट दिया है. कुछ पर बारूदी सुरंगों का जाल बिछा हुआ है. ऐसे में बस्तर के किरन्दूल से विशाखापट्टनम तक चलने वाली एक मात्र सवारी ट्रेन यहाँ के लोगों की जीवन रेखा बन गई थी.

अब रेलवे प्रशासन ने इस एक मात्र सवारी ट्रेन को भी बंद कर दिया है. ट्रेन बंद होने की वजह से सुदूर अंचलों में रहने वाले लोग बेहाल हैं. अब उन्हें सड़क मार्ग के सीमित संसाधनों से काम चलाना पड़ रहा है.

यह ट्रेन बस्तर के लोगों के लिए बहुत मायने रखती है क्योंकि यह उन इलाकों को जोड़ती है जो सड़क मार्ग से जुड़े हुए नहीं हैं.

ट्रेन का परिचालन ठप हो जाने से लोगों को ददक तक पहुँच कर यात्री बस या जीप पकड़ने के लिए मीलों लंबा सफ़र तय करना पड़ता है.

जगदलपुर के वरिष्ट पत्रकार सत्यनारायण पाठक कहते हैं कि कई स्टेशन ऐसे हैं जहाँ तक सड़क मार्ग से पहुँचा नहीं जा सकता है.

सुदूर अंचलों में अगर कोई बीमार होता है तो उसे ट्रेन के ज़रिए ही शहर तक लाया जा सकता था. अब लोगों की परेशानी बढ़ गई है.

राज्य सरकार में संसदीय सचिव और नक्सल प्रभावित बीजापुर के विधायक महेश घगरा का कहना है कि उनके दल यानी भारतीय जनता पार्टी ने ट्रेन के परिचालन के बंद होने का ज़ोरदार विरोध किया है.

उनका कहना है कि ऐसे समय पर जब रेल की सुविधाएँ बढ़ाने की माँग की जा रही थी, बस्तर में चल रही एक मात्र ट्रेन को बंद कर रेलवे प्रशासन ने यहाँ के लोगों का अपमान किया है.

"हम लंबे अरसे से कई और ट्रेनों के शुरू किए जाने की मांग कर रहे हैं. मगर केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय ने इस मामले में उदासीनता ही बरती. हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मांग को लेकर रेल रोको अभियान भी चलाया था."

वहीं इस मामले को लेकर आन्दोलन करने वाले कांग्रेस के वरिष्ट नेता उमा शंकर शुक्ला ने ट्रेन के परिचालन के स्थगित होने का ठीकरा भारतीय जनता पार्टी पर ही मढ़ दिया.

वह कहते हैं कि भाजपा के रेल रोको आन्दोलन की वजह से ही जो एक मात्र ट्रेन चल भी रही थी वह भी बंद हो गई.

शुक्ला कहते हैं, "भारतीय जनता पार्टी के बस्तर संभाग से 11 विधायक हैं. इनकी पार्टी के सांसदों ने भी कभी इस मुद्दे को लेकर संसद में कभी कोई सवाल नहीं उठाया. छत्तीसगढ़ की विधान सभा में भी उन्होंने इस पर कोई चर्चा नहीं की."

जगदलपुर में मौजूद रेलवे के अधिकारी इस मामले में आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं.

कई बार कोशिशों के बावजूद उन्होंने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह नीतिगत मामला है और रेलवे बोर्ड के अधिकारी ही इस पर बयान दे सकते हैं.

हालांकि वह इतना ज़रूर कहते हैं कि नक्सली हिंसा को देखते हुए ट्रेन बंद की गई है. अनौपचारिक रूप से अधिकारी कहते हैं कि माओवादी छापामारों ने कई बार या तो पटरियों पर विस्फोट किया या फिर उन्हें उखाड़ दिया. यही कारण है कि यात्री ट्रेन को बंद करने का फ़ैसला करना पड़ा.

मगर रेलवे प्रशासन की इस दलील को बीजापुर के विधायक सिरे से ख़ारिज करते हैं. उनका कहना है कि अगर नक्सलियों का डर ही कारण है तो फिर माल गाड़ी के ज़रिये इस इलाके से रेलवे लौह अयस्क यानी आयरन ओर की ढुलाई कैसे कर रही है.

"नक्सली हिंसा का खतरा कहाँ नहीं है. हावड़ा-मुंबई मार्ग पर कई वारदातें हुई हैं. वहां तो परिचालन ठप नहीं हुआ. उड़ीसा में भी यही हाल है और वहां भी ट्रेनें चल रहीं हैं. यहाँ भी लौह अयस्क की ढुलाई की जा रही है. रेलवे को माल ढुलाई में फायदा है तो माल गाड़ियाँ चल रही हैं."

कारण चाहे जो भी रहे हों मगर राजनीतिक दलों की रस्सा कशी और रेलवे की उपेक्षा ने अभाव में जी रहे बस्तर संभाग के इलाके के लोगों की ज़िन्दगी को और भी मुश्किल बना दिया है.

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