इतिहास के पन्नों में नौ जनवरी

इतिहास में नौ जनवरी की तारीख़ कई घटनाओं के लिए महत्वपूर्ण है. इसी दिन महमूद अब्बास ने फ़लस्तीनी चुनाव में जीत हासिल की थी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर एंथनी एडेन को स्वास्थ्य कारणों से अपना पद छोड़ना पड़ा था.

2005: फ़लस्तीनी चुनावों में अब्बास को मिली जीत

Image caption यासिर अराफ़ात के बाद महमूद अब्बास फ़तह पार्टी के सबसे महत्वपूर्ण नेता थे

नौ जनवरी 2005 को हुए फ़लस्तीनी राष्ट्रपति चुनाव के शुरुआती रुझानों में ये पता चला था कि प्रधानमंत्री महमूद अब्बास इसमें आसानी से जीत हासिल कर लेंगे.

फ़लस्तीन की एक रिसर्च संस्था सेंटर फॉर पॉलिसी एंड सर्वे रिसर्च ने जो एग्ज़िट पोल करवाए थे उनके मुताबिक़ अब्बास को 66 फ़ीसदी मत मिलने वाले थे जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी मुस्तफ़ा बरगुती को 19.7 फ़ीसदी मत मिलने वाले थे.

हालांकि चुनाव के अंतिम परिणाम एक दिन बाद आनेवाले थे लेकिन महमूद अब्बास के समर्थकों ने उसी दिन से जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया था.

1996 के बाद फ़लस्तीन के लिए हुआ ये पहला राष्ट्रपति चुनाव था जिसमें क़रीब 11 लाख वैध मतदाता थे.

चुनाव में मतदाताओं के उत्साह को देखते हुए महमूद अब्बास ने कहा था कि ये फ़लस्तीनी मतदाताओं के लोकतंत्र के प्रति आस्था का प्रमाण है.

फ़लस्तीन की मुक्ति का आंदोलन चलानवाले नेता यासिर अराफ़ात के नवंबर 2004 में हुए निधन के बाद इस्राइल और फ़लस्तीनियों के बीच नए सिरे से शांति वार्ता की उम्मीद जगी थी क्योंकि इस्राइली प्रधानमंत्री एरियल शेरॉन ने अराफ़ात के साथ शांतिवार्ता करने से इनकार कर दिया था.

जबकि महमूद अब्बास फ़लस्तीनी राजनीतिक दल फ़तह पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से थे और उनकी छवि उदारवादी नेता की थी.

अब्बास को 1990 के दशक में हुई ओस्लो शांति संधि का मुख्य शिल्पी माना जाता था.

अराफ़ात के अंतर्गत 2003 में उन्होंने प्रधानमंत्री की कुर्सी भी संभाली थी लेकिन चार महीने सत्ता में रहने के बाद सत्ता संघर्ष की वजह से उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था.

यासिर अराफ़ात के निधन के बाद वो फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन के अध्यक्ष बने थे उसके बाद से ही उनके उत्तराधिकारियों की दौड़ में प्रमुख माने जा रहे थे.

1957: सर एंथनी एडेन ने इस्तीफ़ा दिया

Image caption सर एंथनी एडेन को पित्ताशय में तकलीफ़ की वजह से पद छोड़ना पड़ा था

नौ जनवरी को ही 1957 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर एंथनी एडेन ने स्वास्थ्य कारणों से अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

प्रधानमंत्री एडन ने अपने बयान में कहा था कि एक महीने पहले जब वो स्वदेश लौटे थे तो उन्हें उम्मीद थी कि उनका स्वास्थ्य सुधर गया है और वो कुछ समय तक अपनी ज़िम्मेदारी निभा सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

1953 में पित्ताशय की बीमारी को ठीक करने के लिए सर एंथनी को कई ऑपरेशन करवाने पड़े थे लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनके पेट की हालत ख़राब होती जा रही थी और डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी थी.

सर एंथनी एक साल और 279 दिन तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे थे.

चुनाव के समय बेहद लोकप्रिय रहे सर एंथनी पिछले साल स्वेज़ संकट के दौरान सैनिक हस्तक्षेप के अपने विवादास्पद फ़ैसले को लेकर आलोचना के केंद्र में रहे थे और ये माना जाने लगा था कि प्रधानमंत्री की कुर्सी पर वो ज़्यादा दिन तक नहीं बने रह सकेंगे.

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