नाइजीरिया: पेट्रोल सब्सिडी ख़त्म करने का विरोध

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Image caption पेट्रोलियम पर सब्सिडी ख़त्म करने का नाइजीरिया में विरोध हो रहा है

नाइजीरिया के राष्ट्रपति गुडलक जोनाथन को देश में पेट्रोलियम पदार्थों पर दी जाने वाली सब्सिडी ख़त्म करने के फ़ैसले से उत्पन्न जनाक्रोश के चलते टेलीविज़न पर बयान देना पड़ा है.

पिछले हफ़्ते की गई इस घोषणा से नाइजीरिया में पेट्रोल के दाम दोगुने तक पहुंच गए हैं.

कई संगठनों ने इसके विरोध में सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है.

सब्सिडी ख़त्म करने की घोषणा के बाद अपने पहले आधिकारिक वक्तवय में राष्ट्रपति जोनाथन ने नाइजीरिया के लोगों से इस मुद्दे पर उन्हें समर्थन देने की अपील की है.

जोनाथन ने कहा कि वे लोगों का दर्द समझते हैं लेकिन ये फ़ैसला सिर्फ़ कुछ समय के लिए है. उनका कहना था, ‘मैं नाइजीरिया के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि मैं आपका दर्द वैसे ही समझता हूं जैसा कि आप लोग महसूस कर रहे हैं. मुझे उन सभी लोगों की पीड़ा से व्यक्तिगत सहानुभूति है जिन्हें इस फ़ैसले के बाद अपनी यात्राओं पर बहुत ज़्यादा ख़र्च करना पड़ रहा है. यदि मैं यहां राष्ट्रीय नवीनीकरण की प्रक्रिया का नेतृत्व न कर रहा होता, यदि मैं आपके पास खड़ा होता तो मैं भी शायद इसी तरह प्रतिक्रिया कर रहा होता और आपकी ही तरह सरकार के इस क़दम की आलोचना कर रहा होता.’

राष्ट्रपति जोनाथन ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह में 25 प्रतिशत की कटौती और अधिकारियों की अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्राओं पर रोक लगाने के आदेश भी दिए हैं.

उन्होंने कहा कि यह नियम राष्ट्रपति समेत सभी राजनीतिक पदाधिकारियों पर लागू होता है.

आदेश में कहा गया है कि विदेशी दौरे पर जाने वाले शिष्टमंडलों का आकार भी छोटा किया जाएगा और केवल उन्हीं यात्राओं को अनुमति मिलेगी जो बेहद ज़रूरी होंगी.

दरअसल सरकार की इस घोषणा से देश भर में ज़बर्दस्त ग़ुस्सा है. लोगों में इस बात को लेकर भी ग़ुस्सा है कि राजनीतिक पदों पर बैठे लोग अभिजात्य वर्ग के लोगों की तरह पेश आते हैं.

यही वजह है कि राष्ट्रपति जोनाथन यह बताना चाहते थे कि इस मुद्दे पर सरकार भी कुर्बानी दे रही है.

नाइजीरिया दुनिया का आठवां सबसे बड़ा तेल निर्यात करने वाला देश है. बावजूद इसके बड़ी संख्या में लोगों को यहां बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है.

इस तेल समृद्ध देश के लोगों को यहां रहने का यही फ़ायदा था कि उन्हें सस्ता तेल मिलता था.

सरकार का कहना है कि वो इस पैसे को देश में स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली आपूर्ति को सुधारने में ख़र्च करेगी.

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