पुस्तकालयों ने वसूले 7.7 करोड़ डॉलर

पुस्तकालयों
Image caption पुस्तकालयों का कहना है कि जुर्माना लोगों को किताबें वापिस करने के लिए तैयार करता है.

ब्रितानी विश्वविद्यालय के पुस्तकालयों ने पुस्तकें देर से लौटाने के लिए पिछले छह सालों के दौरान छात्रों से 7.7 करोड़ डॉलर यानि लगभग 385 करोड़ रुपए जुर्माना वसूल किया है.

किताबें देर से लौटाने पर एक दिन का जुर्माना 15 सेंट यानि सात-आठ रुपए के क़रीब होता है, जिससे यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो किताबें देर से वापिस करने की आदत से मजबूर हैं.

कई किताबें तो कभी पुस्तकालय वापस ही नहीं आती यानी बहुत बड़ी रक़म का कोई हिसाब नहीं है.

पिछले सालों के दौरान लीड्ज़ विश्वविद्यालय के पुस्तकालय ने सबसे ज़्यादा 27 लाख डॉलर जुर्माना वसूल किया.

सही तरीका?

तो क्या यूनिवर्सिटी के छात्र सबसे सुस्त हैं? शायद नहीं क्योंकि लीड्ज़ विश्वविद्यालय ब्रिटेन के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक है तो ज़ाहिर है वहां छात्रों की संख्या भी काफ़ी है.

लीड्ज़ विश्वविद्यालय में पुस्तकालय से जारी किताब को तय सीमा के बाद, सात दिन तक रखने पर 60 सेंट का जुर्माना लगाया जाता है. कुछ लोगों का तर्क है कि इस हिसाब से देखें तो ये बहुत अधिक नहीं है.

लेकिन वहां के एक छात्र टॉम फॉलेट का कहना है कि अकसर डर होता है कि मामला क़ाबू से बाहर हो जाएगा. उन्हें लाइब्रेरी के 46 डॉलर चुकाने हैं.

हालांकि विश्वविद्यालय का कहना है कि जुर्माना सिर्फ़ इसलिए लगाया जा रहा है ताकि लोग किताबें वापस करें और इसमें पैसे उगाहने का कोई इरादा कहीं से नहीं है.

पुलिस की मदद

हालांकि वेस्टमिनस्टर विश्वविद्यालय ने इस मामले में एक अलग ही तरीक़ा अपना रखा है. वो देर से किताबें वापिस करने पर कोई जुर्माना नहीं लगाता और कहता है कि यह जायज़ नहीं है.

छात्र ख़ुद को खुशक़िस्मत मान सकते हैं कि वह अमरीका के मैसाचुसेट्स सूबे में नहीं रहते.

स्थानीय मीडिया में छपी खबरों के अनुसार चार्लटन के एक पुस्तकालय ने जारी की गई दो किताबों को वापिस हासिल करने के लिए पुलिस की सहायता हासिल कर ली.

यह किताबें एक पाँच वर्षीय बच्ची ने पढ़ने के लिए जारी करवाई थीं.

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