इतिहास के पन्नों में 10 जनवरी

इतिहास में 10 जनवरी की तारीख़ कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए प्रसिद्ध है. इसी दिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव जेवियर पेरेज़ द कुइयर खाड़ी युद्ध को टालने के प्रयास में बग़दाद गए थे, ब्रिटेन का कॉमेट जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और जॉर्डन के शाह हुसैन अपनी पहली सार्वजनिक यात्रा पर इस्राइल गए थे.

1991: खाड़ी युद्ध टालने की आख़िरी कोशिश

Image caption जेवियर पेरेज़ द कुइयार युद्ध टालने के कूटनीतिक अभियान पर गए थे.

इतिहास में 10 जनवरी 1991 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव जेवियर पेरेज़ द कुइयार खाड़ी युद्ध टालने की अपनी आखिरी कोशिश के तहत इराक़ की राजधानी बग़दाद गए थे.

संयुक्त राष्ट्र ने इराक़ के शासक सद्दाम हुसैन को पाँच दिनों के भीतर कुवैत से अपनी सेना हटाने का आदेश दिया था और ऐसा न कर पाने पर इराक़ के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की घोषणा की गई थी.

इराक़ के विदेश मंत्री तारिक़ अज़ीज़ और अमरीकी विदेश मंत्री जेम्स बेकर के बीच जेनेवा में एक दिन पहले हुई वार्ता विफल साबित हुई थी.

पेरेज़ द कुइयर बग़दाद में इराक़ी शासक सद्दाम हुसैन से मिलकर शांति स्थापना की दिशा में बात करने वाले थे, लेकिन ये कोशिश भी नाकाम रही थी.

अमरीकी संसद ने इराक़ पर हमला करने के पक्ष में 12 जनवरी को मतदान किया था और 16 जनवरी को ऑपरेशन डेज़र्ट स्टॉर्म के साथ ही खाड़ी युद्ध की शुरुआत हो गई थी.

1954: ब्रिटेन का कॉमेट जेट दुर्घटनाग्रस्त हुआ

10 जनवरी 1954 को ही ब्रिटेन का कॉमेट जेट भूमध्यसागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.

इस दुर्घटना में विमान में सवार सभी 35 लोग मारे गए थे.

ये विमान सिंगापुर से लंदन की यात्रा पर था और रोम से उड़ान भरने के बीस मिनट बाद ही भूमध्यसागर में गिर गया था.

कॉमेट दुनिया का पहला जेट विमान था जिसे ब्रिटेन ने बनाया था.

एक साल तक क़ामयाबी से उड़ान भरने के बाद ऐसे 50 और जेट के निर्माण का ऑर्डर दिया गया था कि ये दुर्घटना घट गई.

जांच में पता चला कि भयंकर तूफ़ान की चपेट में आने की वजह से जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.

1996: जॉर्डन के शाह की ऐतिहासिक इसराइल यात्रा

Image caption जॉर्डन के शाह हुसैन की यात्रा को कूटनीतिक हलकों में सांकेतिक महत्व का ही माना गया था.

इसी दिन 1996 को जॉर्डन के शाह हुसैन अपनी पहली सार्वजनिक यात्रा पर देश के सबसे बड़े शहर तेल अवीव पहुंचे थे.

इसराइल और जॉर्डन ने 1994 में हुई शांति संधि के बाद 46 साल से चले आ रहे युद्ध की समाप्ति की थी और शाह हुसैन की इसराइल यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में आए सुधार के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा था.

हालांकि जॉर्डन में रहने वाले फ़लस्तीनी लोग इस संधि के ख़िलाफ़ थे जो कि देश की आबादी का 60 फ़ीसदी हिस्सा थे.

फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन शाह हुसैन की इस यात्रा की निंदा कर रहा था, उनका कहना था कि पहले उन्हें फ़लस्तीनी शासन वाले इलाक़े का दौरा करना चाहिए था.

इस यात्रा के दौरान शाह हुसैन ने इसराइली प्रधानमंत्री शिमॉन पेरेज़ से मुलाक़ात की थी हालांकि उनकी यात्रा को राजनीतिक की जगह सांकेतिक ही माना गया था.

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