रुश्दी को लेकर राजनीति तेज़

सलमान रूश्दी इमेज कॉपीरइट AP
Image caption सलमान रूश्दी की किताब सैटेनिक वर्सेज़ यानी शैतान की आयतें 1988 में आई थी

दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम या कुलपति द्वारा लेखक सलमान रुश्दी को भारत आने से रोकने की मांग पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में गर्मी ला दी है.

समाजवादी पार्टी से विधायक और उत्तर प्रदेश के बड़े मुसलमान नेताओं में से एक आज़म खान ने भी मौलाना नौमानी के मांग का समर्थन किया है और रुश्दी के आने को एक मुसलमानों के लिए भावनात्मक मुद्दा बताया है.

केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने ना नौमानी की बात का समर्थ किया ना विरोध. खुर्शीद ने कहा, "यह कॉंग्रेस का काम नहीं है कि लोगों को देश में आने से रोके जिसे रुश्दी का आना पसंद ना हो वो कानून का सहारा ले."

भाजपा ने इस रुश्दी पर उठे विवाद को कॉंग्रेस के दिमाग कि उपज बताया और कहा कि यह उत्तर प्रदेश की राजनितिक बहस को भटकाने का एक प्रयास है.

विवाद की जड़

दरअसल सोमवार को भारत के सबसे प्रसिद्ध मदरसों में से एक दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम या कुलपति मौलाना अब्दुल कासिम नौमानी ने सलमान रुश्दी के भारत आने पर कड़ी आपत्ति जताई है.

मौलाना नौमानी ने कहा है कि अपनी किताब सैटेनिक वर्सेज़ में रुश्दी ने जिस तरह से मुसलमानों का दिल दुखाया है उसके बाद उनको भारत आने देना बहुत ही ग़लत बात होगी.

रुश्दी की 1988 में एक किताब आई थी सैटेनिक वर्सेज़ यानी शैतान की आयतें. यह किताब खासी विवादित साबित हुई.

मौलाना अब्दुल क़ासिम नौमानी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा "हमने अखबार में यह ख़बर पढ़ी कि 21 जनवरी को सलमान रश्दी को जयपुर में होने वाले लेखकों के सम्मलेन में बुलाया गया है तो हमने मीडिया माध्यम से प्रधानमंत्री और विदेशमंत्री से गुजारिश की है कि रुश्दी को भारत का वीज़ा ना दिया जाए."

मौलाना नौमानी से जब यह पूछा गया कि इसी वक़्त उत्तर प्रदेश के चुनावों से ज़रा पहले यह गुज़ारिश उन्होंने क्यों की है जब की रुश्दी तो अपनी विवादित किताब लिखने के बाद 24 साल में कई बार भारत आ चुके हैं तो उनका कहना था कि वो हाल ही में दारुल उलूम के कुलपति बने हैं और इसलिए अब ये मांग उठा रहे हैं.

नौमानी ने कहा "मैं पिछले साल के अंत ही में दारुल उलूम का मोहतमिम बना हूँ. और मेरे बनने के बाद पहली बार रुश्दी सफ़र कर रहे हैं. उसके पहले क्या हुआ मैं कुछ कह नहीं सकता."

ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड का समर्थन

बहरहाल आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव और बिहार की जाने माने इस्लामी केंद्र फुलवारी शरीफ़ के प्रमुख मौलाना निज़ामुद्दीन ने भी मौलाना नौमानी का समर्थान किया.

मौलाना निज़ामुद्दीन ने कहा "मौलाना नौमानी ने मुसलमानों की भावनाओं को आवाज़ दी है. क्यों कि रुश्दी ने जो किताब लिखी है उससे पैगम्बर इस्लाम की और इस्लाम की तौहीन हुई है. पूरे हिन्दुस्तान के मुसलमान रुश्दी की आमद को यहाँ पसंद नहीं करते हैं."

इस बीच सलमान रुश्दी ने कहा है कि उन्हें भारत आने के लिए वीज़ा की दरकार नहीं.

संबंधित समाचार