खाने के लिए 'नचाने' पर विवाद

 बुधवार, 11 जनवरी, 2012 को 21:26 IST तक के समाचार
जारवा

जारवा आदिवासियों की बस्तियों में बाहरी लोगों के जाने आने पर प्रतिबंध है

एक ब्रितानी अख़बार गार्डियन में अंडमान निकोबार के जारवा लोगों को पर्यटकों के सामने खाने के बदले में नाचते दिखाए जाने पर भारत सरकार ने इस मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं.

गार्डियन अख़बार के पत्रकार गेथिन चैम्बर्लिन ने एक वीडियो दुनिया के सामने रखा है.

यह जारवा लोगों और कुछ बाहरी लोगों की मुलाक़ात से जुड़ा है.

इस वीडियो में एक तथाकथित पुलिस वाला नग्न और अर्धनग्न जारवा महिलाओं और बच्चों को खाने की थोड़ी सी चीज़ों के बदले में नाचने को कह रहा है.

आरोप प्रत्यारोप

इस कहानी से चारों तरफ़ शोर मच गया है.

अधिकारों के लिए लड़ने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था सरवाईवल इंटरनेशनल के प्रमुख स्टीफन कौरी ने एक बयान में कहा है कि इस ख़बर से उपनिवेशवाद की भावना झलकती है साथ ही इसमें मनुष्यों को चिड़ियाघर के जानवरों की तरह इस्तेमाल करने की कलुषित भावना भी दिखती है.

"पुलिस महानिदेशक कह रहे हैं कि यह वीडियो पुराना है लेकिन वो खुद कयास लगा रहे हैं. जिसने मुझे यह वीडियो दिया है मैं उस पर भरोसा करता हूँ. यह दस साल पुराना नहीं है यह ज़्यादा से ज़्यादा दो तीन साल पुराना है. इस तरह के कई वीडियो हैं"

गेथिन चैंबर्लिन, पत्रकार

अंडमान और निकोबार के पुलिस महानिदेशक एसपी देओल इन आरोपों को नकार रहे हैं और उन्होंने इस वीडिओ को बहुत पुराना बताया.

साथ ही अंडमान प्रशासन ने ही उन दो भारतीय समाचार चैनलों को क़ानूनी नोटिस भेजने की बात कही है जिन्होंने इस वीडियो का भारत में प्रसारण किया था.

देओल ने कहा "इसमें कहा गया है कि एक पुलिसवाला उन्हें नाचने को कह रहा है वो आदमी पुलिसवाला भी नहीं है. जाने यह कब का वीडियो है क्योंकि कई वर्षों से अब जारवा जब दुनिया के सामने आते हैं तो कपड़े पहन कर आते हैं और इस वीडियों में एक महिला को पूरी तरह नग्न दिखाया गया है."

वीडियो को दुनिया के सामने लाने वाले पत्रकार गेथिन चैम्बर्लिन ने कहा कि पुलिस केवल अपने अपराध को छुपाने का प्रयास कर रही है.

चैम्बर्लिन के अनुसार "पुलिस महानिदेशक कह रहे हैं कि यह वीडियो पुराना है लेकिन वो खुद कयास लगा रहे हैं. जिसने मुझे यह वीडियो दिया है मैं उस पर भरोसा करता हूँ. यह दस साल पुराना नहीं है यह ज़्यादा से ज़्यादा दो तीन साल पुराना है. इस तरह के कई वीडियो हैं."

समस्या बरक़रार

जारवा आदिवासियों पर विशेषज्ञ और अंडमान में रहने वाले एन्थ्रोपोलोजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के अधिकारी एंसटाइस जस्टिन को भी यह वीडियो पुराना लगता है लेकिन वो हालात को अच्छा नहीं बताते.

जस्टिन के अनुसार कुछ साल पहले जब वो जारवा लोगों की बस्ती में गए थे तब उन्हें वहां तम्बाखू के गुटखों के पाउच मिले और ऐसे कपड़े मिले जो सरकार ने उन्हें नहीं दिए थे.

वो कहते हैं कि जारवा लोगों का शोषण हो रहा है. वो एक जारवा आदमी एन्मा का किस्सा सुनाते हैं. एन्मा वो आदमी था जिसकी वजह से सबसे पहले जारवा लोग बाहरी मनुष्यों के संपर्क में आए.

जस्टिन ने कहा "यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ उनके संसाधनों का शोषण हो रहा है. एन्मा ने हमें उथला समुद्र दिखा कर बाहरी मनुष्यों के हस्तक्षेप की बात बताई. जारवा लोग एन जाटा बाहरी लोगों को कहते हैं और जाटा मतलब बस्तियां. यानी बाहरी बस्तियों के लोगों से वो संबंध नहीं रखना चाहते."

आदि मानवों के निकटतम वंशज

ऐसा माना जाता है कि दुनिया के सबसे पहले मनुष्य अफ़्रीका में हुए थे और वहीं से वो जत्थों में बाहर निकले. जारवा उन्हीं में से पहले जत्थे में निकले हुए मनुष्यों के वंशज हैं.

वर्ष 1998 तक इनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं था. इन लोगों को सांकृतिक रूप से उन पहले मनुष्यों का निकटतम वंशज माना जाता है.

दुनिया में जारवा लोगों की कुल आबादी 400 से कुछ ही ऊपर है.

वर्ष 1998 से बाहरी दुनिया के मनुष्यों से पहली बार संपर्क में आने के बाद जारवा पर्यटन उद्योग के निशाने पर आ गए.

बाद में मानवविज्ञानियों की कोशिशों के बाद भारत सरकार ने इन लोगों की सभ्यता को बचाने की दृष्टि से बाहरी लोगों को नियंत्रित करने के कई प्रयास किए हैं.

इनकी बस्तियों और इलाक़ों में बाहरी लोगों का जाना भी प्रतिबंधित है.

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