पाकिस्तान वापस लौटे राष्ट्रपति ज़रदारी

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Image caption ज़रदारी के अचानक दुबई जाने से अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हो गया था

पाकिस्तान में बढ़ते तनाव के बीच अचानक एक दिन की व्यक्तिगत यात्रा पर दुबई गए राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी शुक्रवार सुबह यात्रा बीच में ही ख़त्म कर वापस पाकिस्तान लौट गए.

इस तरह ज़रदारी के वापस लौटने के साथ ही, सेना और सरकार के बीच तनाव को देखते हुए उनके देश छोड़ने की अफ़वाहों पर विराम लग गया है.

ज़रदारी की वापसी से पहले उधर पाकिस्तान में जनरल अशफाक़ कियानी के अपने कमांडरों के साथ गुरुवार को आपात बैठक बुलाई थी.

बताया गया था कि राष्ट्रपति ज़रदारी निजी दौर पर दुबई गए थे, जहाँ उन्हें एक शादी में शामिल होना था अधिकारियों का कहना था कि उनकी यात्रा का ताज़ा संकट से कोई संबंध नहीं है.

इधर अमरीका ने कहा है कि पाकिस्तान की स्थिति को लेकर अमरीका में काफ़ी चिंता है मगर ज़ोर दिया कि अमरीका लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई नागरिक सरकार के पक्ष में है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का ये बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान की नागरिक सरकार और सेना के बीच 'मेमोगेट स्कैंडल' को लेकर तनाव काफ़ी बढ़ गया है और देश में एक बार फिर से तख़्तापलट की आशंका जताई गई है.

पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार और फ़ौज के रिश्ते उस समय काफ़ी ख़राब हो गए थे जब एक विवादास्पद मेमो में कथित तौर पर पाकिस्तान सरकार की ओर से ये संदेश भेजा गया कि सरकार सेना की तख्त़ापलट की कोशिश को विफल करने में अमरीका से मदद चाहती है.

क्लिंटन के अनुसार अमरीका चाहता है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं का समाधान देश के क़ानून और संविधान के दायरे में रहकर करे जिससे देश की निर्वाचित सरकार के प्रति उसकी प्रतिबद्धता स्पष्ट हो.

'बेहतर संबंध'

क्लिंटन ने माना कि पाकिस्तान के साथ उनके संबंधों में कई बार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है लेकिन फिर भी 'अमरीका पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को बेहतर करने की दिशा में काम करना चाहता है.'

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, ''हमारी सोच हर हाल में पाकिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार को समर्थन देने की है जो अब भी जारी है. हम सिर्फ़ ये चाहते हैं कि पाकिस्तान अपनी अंदरूनी समस्याओं को इतने साफ़ तरीके से सुलझाए जिससे पाकिस्तान का क़ानून और संविधान बरकरार रहे''.

अमरीका में पाकिस्तान की राजदूत शेरी रहमान से मुलाक़ात के बाद अमरीकी विदेश मंत्री की तरफ से इस तनातनी में आया ये पहला सार्वजनिक बयान था.

हिलेरी ने कहा, ''मैंने पाकिस्तान की राजदूत से साफ़-साफ़ कहा है कि दोनों देशों के बीच के रिश्तों की काफ़ी अहमियत है, इस पर ना सिर्फ़ दोनों देशों के लोगों बल्कि दक्षिण एशिया और पूरी दुनिया की सलामती और निश्चिंतता टिकी है.''

हिलेरी के मुताबिक़ पाकिस्तान में जिस तरह की गतिविधियाँ हो रही हैं उससे अमरीका ख़ासा चिंतित है.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने शनिवार को कैबिनेट की रक्षा समिति की एक बैठक बुलाई है जिसमें सेनाध्यक्ष जनरल कियानी भी शामिल होंगे.

बैठक में दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने की कोशिश की जाएगी.

दरअसल सेना ने यूसुफ़ रज़ा गिलानी के उस बयान को काफ़ी गंभीरता से लिया था जिसमें प्रधानमंत्री गिलानी ने जनरल कियानी पर तीखे प्रहार किए थे.

गिलानी के इस बयान पर सेना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, ''गिलानी के बयान के कई सारे मतलब निकलते हैं जिसके आगे गंभीर परिणाम हो सकते हैं''.

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