'ब्रितानी राजनयिकों ने रुस में जासूसी की थी'

पत्थर इमेज कॉपीरइट Euronews
Image caption तत्कालीन ब्रितानी प्रधानमंत्री के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जॉनाथन पॉवेल ने बीबीसी के सामने इस घटना की पु्ष्टि की है

ब्रिटेन के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने ये बात क़बूल की है कि कुछ ब्रितानी अधिकारी रुस में जासूसी करते हुए पाए गए थे.

उनके अनुसार ये लोग जासूसी के लिए ख़ुफ़िया इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को पत्थरों में छिपाकर रखते हुए पाए गए थे ताकि ब्रितानी राजनयिक जानकारियाँ प्राप्त कर सकें और उन्हें आगे भेज सकें.

रुस ने साल 2006 के जनवरी महीने में इस तरह की जासूसी के आरोप लगाए थे लेकिन ब्रिटेन में पहली बार किसी ने जासूसी की बात सार्वजनिक तौर पर स्वीकार की है.

तत्कालीन ब्रितानी प्रधानमंत्री के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जॉनाथन पॉवेल ने बीबीसी के सामने इस घटना की पु्ष्टि करते हुए कहा कि "उन्होंने (रूसियों ने) सही पकड़ा था और इससे शर्मिंदगी हुई थी."

पॉवेल का कहना था, ''स्पष्ट तौर पर उन्हें इस बारे में कुछ समय से पता था. उन्होंने (रूसियों ने) इस मुद्दे को राजनीतिक उद्देश्य के लिए बचा कर रखा था.''

इस घटना पर एक रिपोर्ट पहले रुसी टेलीविज़न पर प्रसारित की गई जिसमें ये दिखाया गया कि कैसे पत्थरों में ख़ुफ़िया उपकरण लगे हुए थे और इसका इस्तेमाल ब्रितानी राजनयिक सूचना का आदान-प्रदान करने के लिए करते थे.

ग़ैर सरकारी संस्थाओं से मदद

इस वीडियो रिपोर्ट में दिखाया गया कि एक व्यक्ति मॉस्को की गलियों में फुटपॉथ पर चलते-चलते एक पत्थर को देखता और फिर अपनी चाल धीमी करने के बाद फिर तेज़ गति से चलने लग जाता है.

इसके बाद वीडियो फ़ुटेज में एक दूसरे व्यक्ति को दिखाया जाता है जो उस पत्थर को उठा लेता है.

रूस की ख़ुफ़िया सेवा एफ़एसबी ने इस पत्थर को जोड़ते हुए ब्रितानी सुरक्षा सेवाओं पर ये आरोप लगाया कि वो लोकतंत्र समर्थक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जानकारी के बदले गुप्त रुप से पैसा दे रही है.

इसके थोड़े समय बाद से ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक क़ानून बनाया जिसके ज़रिए ग़ैर सरकारी संस्थाओं पर विदेशी सरकारों से फ़ंड लेने पर पांबदी लगा दी गई.

इसका नतीजा ये हुआ कि कई संस्थाएं बंद हो गईं.

पुतिन ने उस समय कहा था, "हमने देखा है कि ख़ुफ़िया सेवाएं ग़ैर सरकारी संगठनों का इस्तेमाल करती हैं. ये ख़ुफ़िया सेवाएं इन संस्थाओं को वित्तीय सहायता देती हैं. इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि ये पैसा ग़लत हाथों में नहीं जाता."

उनका कहना था,''ये क़ानून इसलिए बनाया गया है ताकि रुस के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को रोका जा सके.''

मॉस्को में ब्रिटेन के राजदूत टोनी ब्रंटन ने उस समय कहा था, ''ग़ैर सरकारी संस्थाओं के साथ हमारी जो भी बातचीत होती है वो सबके सामने होती है.''

उनका कहना था,''हमारी जो भी गतिविधियां होती हैं जैसे कितना पैसा है, परियोजना, उसके बारे में सारी जानकारी वेबसाइट पर होती है और ये जानकारी सार्वजनिक है.''

एक मानवाधिकार समूह पर आरोप लगा कि उसने गुप्त पैसा लिया था. इस संगठन ने एफएसबी को मानहानि के मामले में अदालत में घसीटा लेकिन उसकी याचिका ख़ारिज हो गई.

संबंधित समाचार