'नौकरी कम होने की वजह से छात्रों में आई कमी’

 शुक्रवार, 20 जनवरी, 2012 को 07:55 IST तक के समाचार
भारतीय छात्रों का प्रदर्शन

ऑस्ट्रेलिया में कई जगह भारतीय छात्रों ने प्रदर्शन किए थे

भारतीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया लोकप्रिय देशों में एक है. लेकिन पिछले साल ऑस्ट्रेलिया जाने वाले भारतीय छात्रों में बड़ी गिरावट आई है.

क्या ये नस्लभेद की वजह से है या फिर कोई और कारण है? ये जानने के लिए मैंने पर्थ में रह रहे एक भारतीय छात्र के साथ एक दिन बिताया और उनके अनुभव सुने.

इक्कीस साल के नितिन कौशल पर्थ के कर्टिन विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग पढ़ रहे हैं. तीन साल पहले वो गुरदासपुर पंजाब से ऑस्ट्रेलिया इंजीनियर बनने के सपने के साथ आए.

नितिन कॉलेज के आखिरी साल में है. पढ़ाई के साथ-साथ वो पार्ट टाइम जॉब भी करते हैं ताकि पढ़ाई के महंगे ख़र्च को किसी तरह पूरा किया जा सके.

उम्मीद

भारतीय छात्र

कई भारतीय छात्र हिंसा का शिकार हुए हैं

उन्हें उम्मीद है कि अगले साल वो इंजीनियर बन जाएंगे. नितिन के ख्वाब पूरे होने वाले हैं. लेकिन यहां ऑस्ट्रेलिया में सभी भारतीयों के लिए ऐसा नहीं है.

पिछले कुछ साल ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय छात्रों के लिए उतार चढाव भरे रहे हैं.

अप्रैल 2008 में भारतीय मूल के लोगों ने एक भारतीय टैक्सी ड्राइवर की मौत के बाद मेलबर्न के फ्लिंडर स्ट्रीट स्टेशन पर प्रदर्शन किया था.

अगले साल मेलबर्न में ही लगभग 4000 भारतीय छात्रों ने प्रदर्शन किया था और आरोप लगाया था कि भारतीयों पर हमले नस्लभेद से प्रेरित हैं. ऑस्ट्रेलिया में और भारत में मीडिया ने इस मामले को खूब उछाला था.

भारतीयों पर छिटपुट हमले हो रहे थे. नितिन ऑस्ट्रेलिया आ चुके थे और इन वारदातों से विचलित भी हो रहे थे.

नस्लभेद

"एक रात मैं घर जा रहा था कि रस्ते में एक व्यक्ति से हल्की टक्कर हो गई. वो नशे में लग रहे थे. उन्होंने मुझे कुछ बातें सुना दी और वो ग़ुस्से में था. तब डर लगा था कि कहीं कुछ हो न जाए. लेकिन ऐसा किसी के साथ भी हो सकता था"

नितिन कौशल

क्या ख़ुद नितिन को कभी इस तरह की परिस्थिति से गुज़रना पड़ा, ये पूछने पर वो कहते हैं कि थोड़ी बहुत कहा-सुनी होती रहती है, लेकिन गंभीर वारदातें नशे के प्रभाव में होती हैं और लूटपाट के लिहाज से होती हैं, न कि सिर्फ़ नस्लभेदी कारणों की वजह से.

नितिन कहते हैं, "एक रात मैं घर जा रहा था कि रस्ते में एक व्यक्ति से हल्की टक्कर हो गई. वो नशे में लग रहे थे. उन्होंने मुझे कुछ बातें सुना दी और वो ग़ुस्से में था. तब डर लगा था कि कहीं कुछ हो न जाए. लेकिन ऐसा किसी के साथ भी हो सकता था."

वहीं साथ ही बैठे नितिन के साथ रहने वाले विशाल शर्मा बताते हैं, "कुछ साल पहले मैंने एक घर किराए पर लिया था. हम लोग घर के अंदर थे और उस घर को कुछ लोगों ने आग लगा दी थी. लेकिन वो कुछ लोगों की बेवकूफ़ी की वजह से थी और वो नस्लभेदी हमला नहीं था."

नितिन और विशाल दोनों का कहना है कि अगर कुछ वारदातें होती हैं तो वो ज़्यादातर अपराध की आम घटनाएँ होती हैं, न कि नस्लभेदी बर्ताव.

गिरावट

नितिन गर्ग

एक भारतीय छात्र नितिन गर्ग की हत्या कर दी गई थी

लेकिन हाल ही में एक रिपोर्ट आई है, जिससे ये सामने आया है कि ऑस्ट्रेलिया मे भारतीय विद्यार्थियों की संख्या में भारी गिरावट आई है.

ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय छात्र इसकी वजह क्या मानते हैं?

ये पूछने पर नितिन बताते हैं, "सिडनी और मेलबर्न में जो हमले हुए, वो एक बड़ा कारण था. लेकिन इसके अलावा यहां नौकरियां भी कम हो गई थी. मेरे जो साथी यहां आना चाहते थे, मैंने उनसे कहा कि अभी न आएं क्योंकि पढ़ाई के बाद काम मिलना आसान नहीं है. लेकिन मीडिया में जिस तरह की रिपोर्ट तब दिखाई गई थी, मुझे नहीं लगता उतने बुरे हालात थे. दो साल में अगर दो वारदातें हो तो उसे नस्लभेदी बर्ताव नहीं कहना चाहिए."

नितिन मानते हैं कि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़ती क़ीमत और नौकरी में कमी भारतीय छात्रों की संख्या में आई गिरावट का बड़ा कारण है.

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