'हर तरफ़ सन्नाटा पसरा है...'

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नाइजीरिया के दूसरे बड़े शहर कानो में शुक्रवार रात हुए धमाकों में कम से कम 150 लोग मारे गए हैं जबकि काफ़ी लोग बड़ी संख्या में घायल हैं. देश के उत्तरी भाग में बसे शहर में लोगों को अभी भी अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया जा रहा है.

लगभग एक करोड़ की आबादी वाले शहर में 1700 से 2000 भारतीय परिवार रहते हैं जो वहां नौकरी और दूसरे कामों के सिलसिले में गए हैं लेकिन कल रात हुए लगातार धमाकों के बाद नागरिकों में दहशत का माहौल है.

बीबीसी हिंदी ने कानो में मौजूद भारतीय धीरज सिंह से बातचीत की जो वहां 'कमोडिटीज़' में व्यापार करने वाली एक कंपनी के साथ काम करते हैं. सॉफ्टवेयर इंजीनियर धीरज सिंह जिस कंपनी में कार्यरत हैं वो कंपनी तिल, अदरक जैसी सामग्रियों का धंधा करती है.

धीरज सिंह, मध्य प्रदेश के रतलाम ज़िले से तालुक्क़ रखते हैं और सात माह पहले ही गुड़गांव से नौकरी बदलकर नाइजीरिया गए हैं.

अपने अनुभव उन्होंने कुछ इन शब्दों में बयान किए.

'पुलिस कहीं नज़र नहीं आ रही है'

"एक धमाका मेरे घर के पीछे वाली गली में हुआ जिसकी आवाज़ इतनी भीषण थी कि मेरे घर के शीशे टूट गए, बिजली की ट्यूबें टूट गईं, मेरे दोनों बच्चे सहम गए और चारों ओर अंधेरा छा गया. शहर में कर्फ़्यू लगा दिया गया और जो लोग जहां थे, जिसके घर में थे, कल रात से वहीं बैठे हुए हैं.

सड़कों पर चारों ओर सन्नाटा छाया हुआ है. कहीं कोई वाहन या फिर पुलिस की गश्त भी नज़र नहीं आ रही है. फ़िलहाल भारतीय दूतावास या किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी की ओर से भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं किया गया है.

इस क़दर सन्नाटा है कि मेरे और आपके दौरान फ़ोन पर हो रही बातचीत शायद मेरे पड़ोसियों को भी सुनाई दे रही होगी. हर तरफ़ बिल्कुल गहरा सन्नाटा छाया हुआ है, कुछ इस तरह का जिसे कहा जाता है कि सुंई गिरने की आवाज़ भी सुनाई दे जाए.

तेल पर सब्सिडी ख़त्म किए जाने के विरोध में लंबे समय से जारी हड़ताल चंद दिनों पहले ही ख़त्म हुई है, जिसकी वजह से पहले ही ज़रूरी सामानों की दिक्क़त शुरू हो गई थी, अब ये मामला. कम से कम तब बिजली संकट तो नहीं था. फ़िलहाल तो सुबह से ही बिजली ग़ायब है जिससे दूसरी तरह की परेशानियां खड़ी हो रही हैं.

यहां मौजूद भारतीय सांस्कृतिक मंच ने आनेवाले दिनों में खेल के एक समारोह का आयोजन करवाया था अब तो लगता है कि वो भी नहीं हो पाएगा.

फ़िलहाल तो बस एक ही सहारा है कि यहां भारतीयों की बड़ी संख्या है, कानो के अलावा, लागोस, जिगावा और कदुना में भी, तो किसी संकट में एक दूसरे की मदद हो सकती है."

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