दुनिया में बेरोज़गारी चिंताजनक: आईएलओ

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Image caption दुनिया के कई देशों में बेरोज़गारों की संख्या बढ़ती जा रही है

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अभी भी बेरोज़गारी का दौर संकट के स्तर पर बना हुआ है और दुनिया में तीन में से एक आदमी अभी भी बेरोज़गार हैं.

आईएलओ की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के हर तीन में से एक व्यक्ति या तो गरीबी में है या फिर रोज़गार की तलाश में जो एक भयावह स्थिति की तरफ संकेत करता है.

वर्ष 2012 की वैश्विक रोज़गार रिपोर्ट में संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर दुनिया भर में सम्यक विकास और सामाजिक जुडाव बनाए रखना है तो अगले दस वर्षों में साठ करोड़ नौकरियों की व्यवस्था करनी ज़रुरी होगी.

संगठन के अनुसार वर्ष 2012 भी रोज़गार के लिए बहुत अच्छा नहीं रहेगा क्योंकि कई देशों की आर्थिक विकास दर शून्य या बहुत कम रहेगी यानी रोज़गार के अवसर पैदा नहीं होंगे.

हालांकि 2009 में कई देश मंदी के दौर से धीरे धीरे निकले थे लेकिन नई नौकरियों की संभावना बहुत कम बनी जिसके कारण क़रीब दो करोड़ बेरोज़गार रहे.

संगठन के अनुसार हर वर्ष करीब बेरोज़गार लोगों की संख्या में चार करोड़ लोग जुड़ते जा रहे हैं. यही कारण है कि अगले दस वर्षों में 60 करोड़ नौकरियों की आवश्यकता है.

बेरोज़गारी से सबसे अधिक परेशान युवा वर्ग है क्योंकि बेरोज़गारों में ऐसे लोगों की संख्या सबसे अधिक है जिनकी उम्र 15 से 24 साल के बीच है.

इतना ही नहीं ऐसे लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है जो वो काम कर रहे हैं जिसमें पैसे बहुत कम मिलते हैं. दुनिया के करीब 90 करोड़ लोगों को गरीब कामगार के रुप में चिह्नित किया जा सकता है.

गरीब कामगार का अर्थ ये हुआ कि वो लोग जो प्रतिदिन दो डॉलर से कम कमाते हैं.

संगठन ने चेतावनी दी है कि सरकारों की सबसे पहली प्राथमिकता नए रोज़गार पैदा करना होनी चाहिए और अगर ऐसा न किया गया तो आर्थिक विकास जारी नहीं रखा जा सकेगा और सामाजिक विद्रोह की संभावना बढ़ जाएगी.

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