विरोध में क़ैदियों ने होंठ सी लिए

 बुधवार, 25 जनवरी, 2012 को 21:07 IST तक के समाचार

जबरन खाना खिलाए जाने के विरोध में क़ैदियों ने अपने होंठ सी लिए हैं.

किर्गिस्तान के जेल अधिकारियों के मुताबिक वहां एक हज़ार से ज़्यादा क़ैदियों ने जेलों में रहन-सहन के बद्तर हालात के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए अपने होंठ सी लिए हैं.

पिछले हफ़्ते एक जेल में दंगा पुलिस के साथ हुई हिंसक झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हो गए थे.

उसके बाद से ही सैंकड़ों क़ैदी भूख हड़ताल पर हैं. मध्य-एशियाई देश किर्गिस्तान में ये विरोध अब अन्य जेलों में भी फैल गया है.

अधिकारियों के मुताबिक क़रीब 1,300 क़ैदियों ने अपने होंठ सी लिए हैं और 7,000 क़ैदी भूख-हड़ताल पर हैं.

ख़बरों के मुताबिक क़ैदियों ने जेल अधिकारियों को जबरन खाना खिलाने की कोशिश से रोकने के लिए अपने होंठ सी लिए.

तुर्सुनबेक अकुन, मानवाधिकार कार्यकर्ता

"वो आश्वासन चाहते हैं कि फिर जानलेवा मारपीट नहीं होगी, उन्हें डर है कि भूख हड़ताल वापस लेते ही उन्हें पीटा जाएगा."

अधिकारियों का दावा है कि ये विरोध योजनाबद्ध तरीके से अपराधी गिरोहों द्वारा करवाया गया है. ये गिरोह जेलों के अंदर सख़्त कायदे-कानून के ख़िलाफ़ हैं.

क़ैदियों का बुरा हाल

समाचार एजंसी एसोसिएटिड प्रेस के मुताबिक कारावास सेवा प्राधिकार की प्रवक्ता एलिओनोरा शेरशेनालिएवा ने मंगलवार को कहा कि क़ैदियों ने अपने मुंह इस तरह से सी लिए हैं कि वो सिर्फ़ पेय पदार्थ ही ग्रहण कर सकें.

बीबीसी संवाददाता रेहान डिमिट्री के मुताबिक क़ैदियों की हालत बहुत ख़राब है, कुछ ज़मीन पर लेटें हैं तो कुछ बोल नहीं पा रहे.

किर्गिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता तुर्सुनबेक अकुन ने कुछ क़ैदियों से मुलाकात की और बीबीसी को बताया कि उनकी मुख्य मांग है कि जेल के सुरक्षाकर्मियों द्वारा किया जा रहा अत्याचार रोका जाए.

अकुन ने कहा, “वो आश्वासन चाहते हैं कि फिर जानलेवा मारपीट नहीं होगी, उन्हें डर है कि भूख हड़ताल वापस लेते ही उन्हें पीटा जाएगा.”

किर्गिस्तान की जेलों में क्षमता से ज़्यादा क़ैदी रखे जाते हैं और वहां अक्सर बीमारियां फैलने की ख़बरें आती रहती हैं.

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