डाओ केमिकल्स की वजह से इस्तीफ़ा

लंदन में आयोजित होने वाले ओलंपिक खेलों से जुड़े 'कमीशन फॉर सस्टेनेबल लंदन 2012' की एक सदस्य मेरिडिथ असेक्ज़ेंडर ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

उन्होंने कहा है कि डाओ केमिकल्स के आयोजन से जुड़े होने की वजह से वे इस्तीफ़ा दे रही हैं.

यह कमीशन लंदन ओलंपिक से जुड़े उद्योगों की नैतिक पृष्ठभूमि को देखने के लिए बनाया गया है.

'डाओ को वैधानिकता'

मेरिडिथ असेक्ज़ेंडर ने लंदन से बीबीसी को बताया कि ओलंपिक आयोजन समिति ने उनके कमीशन को डाओ केमिकल्स के खेलों से प्रायोजक के रूप में जुड़ने के फ़ैसले पर नज़र डालने के लिए कहा था. कमीशन ने डाओ केमिकल्स को प्रायोजक के रूप में जोड़ने को सही ठहराया था. मेरिडिथ ने कहा " मुझे लगता है कि कमीशन और लंदन खेलों के आयोजक दोनों ही डाओ केमिकल्स और उसके दावों को एक तरह से वैधानिकता प्रदान कर रहे हैं और मैं इससे बहुत ही नाखुश थी. कंपनी कहती है कि उसकी भोपाल के प्रति कोई ज़िम्मेदारी नहीं है पर मुझे जो तथ्य दिखाए गए वो इसके विपरीत हैं."

जब मेरिडिथ से यह पूछा गया कि उन्होंने इस्तीफा देने में इतने दिन क्यों लगाए जबकि डाओ केमिकल्स के लंदन ओलंपिक से जुड़ने पर विवाद तो लम्बे समय से जारी हैं तो उन्होंने कहा कि वो चीज़ों को कमीशन के अंदर से बदलने की कोशिश कर रही थीं.

मेरिडिथ ने कहा " मेरा निर्णय त्वरित नहीं था. मैंने इस्तीफ़ा देने के पहले विचार बनाया. मुझे आशा था कि मैं अंदर से कुछ बदल पाउंगी लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तब मैंने इस्तीफ़ा दे दिया."

विवाद

वर्ष 1984 में यूनियन कार्बाइड द्वारा चलाए जा रहे एक कारखाने में दुर्घटना के कारण हज़ारों लोगों की लोगों की मौत हो गयी थी. यह कारखाना हालाँकि तब से बंद पड़ा है लेकिन इसके अंदर रखे रसायन अभी भी पर्यावरण को और भूजल को प्रदूषित कर रहे हैं.

भोपाल गैस पीड़ितों के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं के अलावा कई खिलाड़ियों और ब्रितानी राजनेताओं ने भी डाओ केमिकल्स को भोपाल में जारी प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार बताया है. साल 1999 में डाओ केमिकल्स ने यूनियन कार्बाइड को खरीद लिया.

डाओ केमिकल्स को लंदन ओलंपिक के मुख्य स्टेडियम को चारों तरफ से ढँकने के लिए रंगीन बैनर उपलब्ध करवाने को कहा गया है. डाओ केमिकल्स ने इसके लिए 70 लाख पाउंड की राशि दी है.

डाओ का इनकार

इस पूरे आंदोलन पर डाओ लगातार कहता आया है कि भोपाल के यूनियन कार्बाईड कारखाने को डाओ कोमिकल्स ने कभी नहीं चलाया लेकिन इस हादसे से बहुत कुछ सीखा है और रसायन उद्योग को सुरक्षित बनाने के लिए काम किया है.

लंदन 2012 आयोजन समिति के अध्यक्ष लॉर्ड को डाओ का बचाव करते हैं.

उन्होंने कहा कि भोपाल गैस कांड के दौरान डाओ कैमिकल का यूनियन कार्बाईड से कोई लेना देना नहीं था. लॉर्ड को के अनुसार डाओ कैमिकल उस समय भी यूनियन कार्बाईड के संपर्क में नहीं थी जब इस हादसे का 'अंतिम और सही' निपटारा हुआ था.

डाओ केमिकल्स रसायन के क्षेत्र में काम करने वाली दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है.

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