'भारत-बर्मा के बीच व्यापार कॉरीडोर'

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Image caption यिंगलग चिनावट भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि थीं

भारत के दौरे पर आईं थाईलैंड की प्रधानमंत्री यिंगलक चिनावट ने कहा है कि वो दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापार संबंधों को बढ़ाने के उद्देश्य से बर्मा के दावेए में एक विशाल बंदरगाह और औद्योगिक केंद्र स्थापित करना चाहती हैं.

यिंगलक चिनावट दो तीन दिनों की आधिकारिक यात्रा पर दिल्ली आई हैं.

भारतीय अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ दौरे के बीच उद्योग समूहों की एक बैठक में थाईलैंड की प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार दक्षिण-पूर्वी एशिया में आवागमन को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जिसके लिए वो दावेए में एक बंदरगाह और औद्योगिक केंद्र का निर्माण करवाना चाहती हैं.

बड़ी परियोजना

पचास अरब डॉलर की कुल क़ीमत पर कई चरणों में बनाई जाने वाली इस परियोजना को दक्षिण-पूर्वी एशिया की अबतक की सबसे बड़ी आधारभूत परियोजना बताई जा रही है.

योजना के मुताबिक़ थाईलैंड पहले से ही बर्मा के इस क्षेत्र को ख़ुद से जोड़ने के लिए सड़क और दूसरी परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार ये परियोजना पाकिस्तान में चीन की ओर से तैयार किए जा रहे ग्वादर बंदरगाह, श्रीलंका के हंबनटोटो और बर्मा के क्याक फू से कहीं बड़ा होगा.

चीन जिस बंदरगाह का निर्माण कर रहा है वो अपेक्षाकृत कम विकसित इलाक़े से घिरा है जबकि दावेए गलियारा आर्थिक रूप से विकसित क्षेत्रों को जोड़ेगा.

सीधा रास्ता

दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्विविधालय के अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय की प्रोफेसर मनमोहनी कौल कहती हैं कि क्षेत्र के कई देश - जिसमें बर्मा, थाईलैंड, लाओस, वियतनाम, कंबोडिया, मलेशिया वग़ैरह को अपने समुद्री व्यापार के लिए मुख्यत: मले प्रायद्वीय और इंडोनिशिया के सुमात्रा द्वीपों बीच मौजूद एक समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करना होता है.

इस रास्ते पर पहले ही काफ़ी ट्रैफ़िक है और एक नया रास्ता बनने से वो दिक़्कत कम होगी.

दूसरे थाईलैंड चाहता है कि वो इस क्षेत्र में एक बड़े औद्योगिक केंद्र के तौर पर उभरे.

थाईलैंड के प्रधानमंत्री के दिल्ली दौरे के बीच बर्मा के विदेश मंत्री भी यहाँ की यात्रा करके गए हैं.

मनमोहनी कौल का कहना है कि हालांकि साफ़ तौर पर सामान्यत: लोग इस बात को कहने से कतराते हैं लेकिन दक्षिण-पूर्वी एशिया के देश चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित हैं, ख़ासतौर पर हाल के दिनों में साउथ चाईना सी में जो कुछ हुआ.

हाल में वियतनाम और चीन के बीच इस मामले को लेकर भारी तनाव था.

मनमोहनी कौल कहती है कि ये देश चाहते हैं कि भारत और जापान जैसे देशों का प्रभाव इस क्षेत्र में बढ़े ताकि किसी एक पर निर्भरता न बनी रहे.

भारत के दक्षिणी क्षेत्र के लिए भी, जहां उधोग-धंधे हाल के देशों में तेज़ी से बढ़े हैं, ये पूरे दक्षिण-पूर्वी एशिया में व्यापार को बढ़ाने का एक नया रास्ता खोलेगा.

बर्मा जो सालों से अलग-थलग पड़ा है उसके लिए ये आर्थिक विकास की शुरूआत का एक नया मौक़ा होगा.

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