लीबिया के हथियारबंद गुटों से संयुक्त राष्ट्र चिंतित

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Image caption लीबिया में विद्रोहियों और नागरिक गुटों की सक्रीयता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को मिली सूचनाओं के मुताबिक लीबिया में सक्रिय हथियारबंद गुट ना सिर्फ बेलगाम हो रहे हैं बल्कि उन्होंने हज़ारों लोगों को हिरासत केंद्रों में कैद कर रखा है.

इतना ही नहीं ये भी कहा जा रहा है कि लीबिया की कमज़ोर अतंरिम परिषद सरकार को भी देश में अपना अधिकार जताने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

सुरक्षा परिषद को अपने अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार देश के त्रिपोली, बानी वालिद और बेनघाज़ी शहरों में हुए हालिया हिंसक वारदात इसी समस्या को दर्शाते हैं.

अधिकारियों ने चेताते हुए कहा है कि, कम से कम आठ हज़ार से ज़्यादा गद्दाफ़ी समर्थक इन नागरिक गुटों के कब्ज़े में यातना झेल रहे हैं.

सोमवार को गद्दाफी़ के असर वाले बानी-वालिद इलाके में हुई एक हिंसक घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी.

लीबिया में संयुक्तराष्ट्र के दूत इयान मार्टिन ने बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर में बताया कि बानी-वालिद में हथियारबंद लोगों और विद्रोहियों के बीच हुए झड़प को ग़लत तरीके से पेश किया गया.

इस झड़प के बारे में संयुक्त राष्ट्र को गद्दाफ़ी समर्थकों द्वारा दोबारा बानी-वालिद शहर पर अधिकार जमाने की कवायद बतायी गई.

हालांकि उन्होंने कहा कि ये घटना गद्दाफ़ी समर्थकों और विद्रोहियों के साथ सामंजस्य बिठाने की चुनौती के तौर पर सामने आई है.

उन्होंने बताया कि इस महीने त्रिपोली और अन्य शहरों में हुए हिंसक वारदातों के लिए नागरिक गुट ज़िम्मेदार है.

मार्टिन ने कहा,''जनरल गद्दाफ़ी का शासन भले ही ख़त्म हो गया हो लेकिन सच्चाई ये है कि लीबिया के लोग अब भी उसके गहरे ज़ख्म को झेल रहे हैं''.

उन्होंने इसकी व्याख्या करते हुए इसे,''कमज़ोर और अनुपस्थित राजकीय-नागरिक संस्थानों के साथ अप्रभावी राजनैतिक पार्टियों की विरासत कहा है जिससे देश में हो रहे बदलाव में बाधा आ रही है''.

मार्टिन ने इन पूर्व लड़ाकुओं से निपटने के लिए कदम उठाए जाने की बात कही है.

लेकिन जिस तरह से लीबिया में बड़े पैमाने पर हथियार आसानी से उपलब्ध है और कई हथियारबंद समूह वहां सक्रिय हैं उससे सरकार को अपनी वैधता साबित करने में काफ़ी कठिनाई हो रही है.

हालांकि अब तक अधिकारियों ने वहां किसी भी बड़ी घटना को होने से रोक रखा है लेकिन ऐसा हमेशा होना संभव नहीं.

भयावह जानाकारियां

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लै ने लीबिया के क़रीब 60 हिरासत केंद्रों में कैद किए गए साढ़े आठ हज़ारों बंदियों पर चिंता जतायी है.

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Image caption इयान मार्टिन, लीबिया में संयुक्त राष्ट्र के दूत

पिल्लई को उनके अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इनमें से ज्य़ादातर बंदी या तो गद्दाफ़ी समर्थक हैं या अफ्रीकी नागरिक,जिन्हें केंद्रीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है.

उन्होंने अधिकारियों से इन गै़रकानूनी जेलों पर नियंत्रण पाने और प्रताड़ितों को कानूनी मदद देने का आग्रह किया.

हालांकि लीबिया के रक्षा-मंत्री ओसामा-अल-जुवाली ने हालात को नियंत्रण में बताया है.

ओसामा के पहुंचते ही वहां इकट्ठा हुए राष्ट्रीय अंतरीम परिषद के वफादार सैनिकों ने उन्हें घेर लिया था. ऐसा माना जा रहा था कि विद्रोहियों के साथ बातचीत असफल होने पर वे हमला भी कर सकते थे, लेकिन उनके एक कमांडर के मुताबिक वे वहां सिर्फ बातचीत के लिए आए थे.

शहर में जमा हुए विद्रोहियों ने एनटीसी के सैनिकों को पास के जंगलों में ठेल दिया है.

शहर के लोगों ने बताया कि शहर का 90 प्रतिशत भाग इन हथियारबंद गुटों के कब्ज़े में है.

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