पापुआ न्यू गिनी में सैन्य विद्रोह

Image caption पापुआ के पूर्व प्रधानमंत्री सर माइकल सोमारे जिन्हें पद से हटा दिया गया था.

पापुआ न्यू गिनी में सैनिकों ने विद्रोह कर दिया है और सैन्य प्रमुख को अपदस्थ कर के नज़रबंद रखा गया है.

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गिनी की राजधानी पोर्ट मोर्सबी में सुबह सुबह यह विद्रोह हुआ है.

एबीसी न्यूज़ के अ्नुसार 12 से 20 सैनिकों का एक समूह इस विद्रोह में शामिल था.

माना जा रहा है कि इस घटना का संबंध सर माइकल सोमारे पीटर ओ नील के बीच तनाव से है. सोमारे पूर्व में देश के प्रधानमंत्री रहे हैं और पिछले वर्ष जब वो इलाज के लिए विदेश गए थे तो उन्हें पद से हटा दिया गया था और नील इस पद पर आ गए थे.

इसके बाद से दोनों ही नेता प्रधानमंत्री होने का दावा करते रहे हैं.

इस विद्रोह की अगुआई रिटायर्ड कर्नल याउरा सासा ने की है जो पूर्व में इंडोनेशिया के डिफेंस अटाचे रह चुके हैं.

उन्होंने सैन्य प्रमुख ब्रिगेडियर फ्रांसिस अगवी को नज़रबंद करने के बाद खुद को सैन्य प्रमुख घोषित कर दिया है.

रेडियो न्यूज़ीलैंड के अनुसार सासा ने कहा कि उन्होंने कोई विद्रोह नहीं किया है और उनकी नियुक्ति सर माइकल सोमारे ने की है.

ब्रिगेडियर जनरल फ्रांसिस अगवी वर्तमान प्रधानमंत्री पीटर ओ नील के समर्थक माने जाते हैं.

एबीसी की रिपोर्ट के अनुसार सैनिकों ने ताउरामा बैरक में तैनात सुरक्षा गार्डों पर काबू किया और उसके बाद अगवी को गिरफ्तार करने मुरे बैरक में गए.

अगस्त महीने में सर माइकल को उनकी अनुपस्थिति में संसद ने वोटिंग के ज़रिए पद से हटा दिया था जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में था और कोर्ट ने दिसंबर में कहा था कि संसद ने पीटर ओ नील को अवैध तरीके से प्रधानमंत्री चुना है और सर माइकल ओमारे को प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए.

ओ नील को देश की सिविल सेवा का समर्थन प्राप्त है और वो अगस्त के बाद से देश का कार्यभार संभाले हुए हैं. उन्होंने कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी पद नहीं त्यागा.

अभी तक पीटर ओ नील के कार्यालय से कोई बयान नहीं जारी किया गया है.