फ़िल्म से न्यूयॉर्क के मुसलमान नाराज़

मुस्लिम
Image caption नए रंगरूटों को दिखाई गई थी फ़िल्म

न्यूयॉर्क में मुस्लिम समुदाय के कई लोग एक विवादित फिल्म को दिखाए जाने के विरोध में शहर के पुलिस कमिश्नर रेमंड केली के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

वर्ष 2010 में पुलिस विभाग में ट्रेनिंग के दौरान 'द थर्ड जेहाद' नाम की एक फ़िल्म क़रीब 1500 ऐसे नए रंगरूटों को दिखाई गई थी जिन्हे आतंकवाद से निपटने का प्रशिक्षण दिया जा रहा था.

इस फिल्म में जेहादी मुसलमानों को दर्शाते हुए कहा गया था कि मुसलमान अमरीका में शरिया का कानून लागू करना चाहते हैं.

यहां तक की एक तस्वीर में अमरीकी राष्ट्रपति के सरकारी निवास और दफ़्तर व्हाईट हाउस पर काले रंग का वैसा झंडा भी फ़हराता हुआ दिखाया गया है जिसका प्रयोग अल-कायदा जैसे आतंकी गुट करते हैं.

मुसलमानों का कहना है कि इस फ़िल्म में पूरे मुस्लिम समुदाय को आतंकवादियों की तरह दिखाया गया है जिससे आतंकवादियों से निपटने की ट्रेनिंग लेने वाले पुलिस अफसरों के मन में भी इस समुदाय विशेष के प्रति घृणा पैदा होगी.

नफ़रत पैदा करने की कोशिश

गुरूवार को शहर की काउंसिल की इमारत के बाहर आयोजित एक प्रदर्शनी में मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ-साथ कई मानवाधिकार कार्यकर्ता, सर्व-धर्म संस्थाओं के प्रतिनिधि और स्थानीय काउंसिल के सदस्य शामिल हुए.

पिछले हफ़्ते जब इस फिल्म को दिखाने की ख़बर सामने आई तो पुलिस कमिश्नर ने ऐसी कोई फिल्म दिखाए जाने से साफ़ इंकार कर दिया था.

बाद में जब फिल्म के प्रोड्यूसर ने बयान जारी करते हुए कहा कि खुद पुलिस कमिश्नर रेमंड कैली ने भी इस फिल्म के लिए वर्ष 2007 में उनको 90 मिनट का इंटरव्यू दिया था तो रेमंड कैली ने ट्रेनिंग के दौरान फिल्म दिखाए जाने की बात मानते हुए माफ़ी मांग ली.

एक बयान जारी करते हुए पुलिस कमिश्नर रेमंड कैली ने कहा,"मैं मुस्लिम समुदाय के लोगों से माफी मांगता हूं जिन्हें यह फिल्म भड़काऊ लगी हो और ये भी मानता हूं कि पुलिस विभाग के अहाते में इस फ़िल्म को दिखाया जाना गलत था."

लेकिन शहर के मुसलमान पूरे मामले को लेकर पुलिस कमिश्नर से बेहद नाराज़ हैं और उनकी माफ़ी को नकार रहे हैं.

मुसलमानों की मांग है कि पुलिस कमिश्नर रेमंड कैली और उनके प्रवक्ता पॉल ब्राउन को ग़लत जानकारी देने के लिए अपने-अपने पदों से हटा दिया जाए.

एक अमरीकी मुस्लिम संस्था 'मुस्लिम अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ कोएलिशन' की लिंडा सरसूर कमिश्नर की माफ़ी को मानने को तैयार नहीं हैं.

लिंडा कहती हैं,"कमिशनर रेमंड कैली अपनी माफी अपने पास रखें क्योंकि अब हमें उनकी किसी बात पर भरोसा नहीं रहा. उन्होंने बार-बार ना सिर्फ़ झूठ बोला है बल्कि ग़लतबयानी भी की है, अब हमें सिर्फ़ उनका इस्तीफा चाहिए."

उधर शहर के मेयर माईकल ब्लूमबर्ग ने फिल्म को दिखाए जाने को तो ग़लत बताया है लेकिन पुलिस कमिश्नर के इस्तीफे़ की मांग को भी मानने से इंकार कर दिया है.

ब्लूमबर्ग कहते हैं "ये सही है कि इस फिल्म का बनाया जाना थोड़ा शर्मनाक था लेकिन पुलिस कमिश्नर या उनके प्रवक्ता को इसके लिए इस्तीफ़ा देने की कोई ज़रूरत नहीं है."

लेकिन शहर की काउंसिल के एक सदस्य हुमाना विलियम्स ने काउंसिल के बाहर हो रहे प्रदर्शन में शामिल होकर पुलिस कमिश्नर के प्रवक्ता पॉल ब्राउन को फौरन हटाए जाने की मांग कर डाली और कमिश्नर से मामले की जांच किए जाने की मांग की है.

उन्होंने दोषियों को सज़ा दिए जाने की भी वक़ालत की है.

Image caption लिंडा सरसूर का कहना है कि माफ़ी मांगने से काम नहीं चलेगा

प्रदर्शन में शामिल पाकिस्तानी मूल के अमरीकी नागरिक शाहिद कहते हैं,"शहर के पुलिस विभाग ने मुसलमानों पर निगरानी रखी उनकी जासूसी की और अब उनके साथ दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरी जैसा बर्ताव कर रहे हैं. हम पुलिस विभाग में भेदभाव न करने वाला अधिकारी चाहते हैं."

मुसलमानों के साथ-साथ मानवाधिकार संस्थाओं ने भी शहर के काउंसिल से इस पूरे मामले की छानबीन करने और दोषियों को सज़ा दिलवाए जाने की मांग की है.

शहर के पुलिस विभाग को धन मुहैया कराने काम यही काउंसिल करवाती है जिसके प्रति पुलिस-विभाग की जवाबदेही बनती है.

जिन पुलिसवालों को ट्रेनिंग के दौरान यह फिल्म दिखाई गई है उनको भी दोबारा ट्रेनिंग दिए जाने की मांग की जा रही है.

अब इस मामले पर चर्चा करने के लिए काउंसिल में बैठक बुलाए जाने और केंद्रीय कानून मंत्री एरिक होल्डर को भी मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की जा रही है.

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