अमरीकी सैन्य बजट में अरबों की कटौती, सिकुड़ेगी सेना

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Image caption अमरीका एफ़-35 खरीदता रहेगा लेकिन छिपकर मार करने वाले लड़ाकू जेट कम खरीदे जाएँगे

अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में लगभग एक दशक के युद्ध अभियानों के बाद अमरीका ने अपने रक्षा बजट में अगले दस साल में लगभग 487 अरब डॉलर की कटौती की घोषणा की है.

साथ ही अगले पाँच साल में थल सेना और मरीन कोर में लगभग 92 हज़ार सैनिकों की संख्या घटाई जाएगी और कुछ सैन्य अड्डों को बंद भी किया जा सकता है.

अमरीकी रक्षा मंत्री लियोन पेनेटा ने ये घोषणा करते हुए कहा, "ये बहुत ही मुश्किल काम है. यह एक मुश्किल चुनौती है और किसी को इस मुश्किल को कम नहीं आंकना चाहिए. बजट घाटे को कम करने के मुद्दे ये एक बड़ी समस्या है. बजट घाटे के बारे में बात करना आसान है लेकिन इसके बारे में कुछ भी करना बहुत मुश्किल है..."

'दुनिया में सबसे ताकतवर बने रहना'

अमरीकी रक्षा मुख्यालय में बोलते हुए पेनेटा ने अमरीकी संसद कांग्रेस के अपील की कि कांग्रेस और कटौतियाँ न थोपे क्योंकि इससे सेना के खोखले हो जाने का ख़तरा है.

पेनेटा ने कहा कि एक दशक के युद्ध के बाद ये मौक़ा आया है कि नई रक्षा रणनीति बनाई जा सके जिससे सेना की संख्या तो कम हो लेकिन वो पहले से अधिक लचीली हो.

पेनेटा का कहना था कि अमरीकी नए एफ़-35 जेट ख़रीदता रहेगा लेकिन छिपकर वार करने वाले लड़ाकू विमानों की ख़रीद में कुछ कमी आएगी.

'एशिया पर ध्यान'

उन्होंने कहा कि अमरीकी सेना अब बड़े युद्ध क्षेत्रों - इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान से ध्यान हटाकर एशिया समेत राष्ट्रीय हित के अहम क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी.

रक्षा मंत्री पेनेटा ने ज़ोर देकर कहा, "हमारा रवैया विश्व में सबसे ताकत सेना को बनाए रखने का था ताकि वह खोखली सैन्य शक्ति न बन जाए."

उधर अनेक राजनीतिक नेताओं ने इस बजट का विरोध किया है.

टेक्सास के सीनेटर जॉन कॉर्निन का कहना था, "हमें ग्यारह सितंबर (2001) के हमलों से पहले की व्यवस्था में ले जाने से देश को गंभीर ख़तरा हो सकता है."

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