इतिहास के पन्नों में 8 फ़रवरी

अगर इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएंगें कि आज ही के दिन किंग जॉर्ज पंचम की मौत के बाद राजकुमारी एलिज़ाबेथ ब्रिटेन की महारानी बनी थीं और इस्राइल के रक्षा मंत्री ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

1952: राजकुमारी एलिज़ाबेथ बनी ब्रिटेन की महारानी

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Image caption जब जॉर्ज पंचम का निधन हुआ तो उस समय एलिज़ाबेथ नैरोबी के पास एक होटल में आराम फ़रमा रही थीं

8 फ़रवरी 1952 के दिन महारानी एलिज़ाबेथ ब्रिटेन की महारानी और राष्ट्रमंडल देशों की अध्यक्ष बनी थीं.

56 वर्षीय किंग जॉर्ज पंचम की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई थी, जिसके बाद 25 वर्षीय एलिज़ाबेथ के कांधों पर बड़ी ज़िम्मेदारियां आ गई थीं.

महारानी एलिज़ाबेथ ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “मेरे पिता की अचानक मौत हो जाने के बाद मुझे राज्य की ज़िम्मेदारियां सौंप दी गई हैं. मेरा दिल बहुत भरा हुआ है, इसलिए मैं ज़्यादा नहीं बोल पाउंगीं. सिर्फ़ इतना कहूंगी कि मैं हमेशा वैसा ही काम करूंगीं, जैसा मेरे पिता ने किया. विश्व भर में अपनी प्रजा की ख़ुशी के लिए काम करूंगीं.”

जब उनके पिता की मौत हुई, उस समय एलिज़ाबेथ की शादी को मात्र पांच साल हुए थे और वो महाराजा जार्ज पंचम के स्थान पर अफ्रीका के दौरे पर थे जहां से उन्हें ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जाना था.

छह फरवरी की सुबह जॉर्ज पंचम का निधन हुआ तो उस समय एलिज़ाबेथ नैरोबी से 100 मील दूर ट्रीटॉप्स होटल में आराम फरमा रही थीं.

लेकिन जैसे ही उन्होंने ये ख़बर सुनी, वे तुरंत ब्रिटेन लौट आई थीं.

1983: एरियल शेरॉन ने रक्षा मंत्री का पद छोड़ा

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Image caption भारी राजनीतिक और जनता के दबाव के बीच रक्षा मंत्री को इस्तीफ़ा देना ही पड़ा

आज ही के दिन इस्राइल के रक्षा मंत्री एरियल शैरॉन ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

ऐसा उन्हें इसलिए करना पड़ा क्योंकि उनके ख़िलाफ़ हुई एक जांच में सामने आया था कि शरणार्थियों के कैंप में हुए नरसंहार को रोकने में वे नाकामयाब रहे थे.

1982 में लेबनॉन में हुई हत्याओं से जुड़े मामले में जांच के बाद कहा गया कि वे अप्रत्यक्ष रूप से इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार थे.

बेरूट के पास शातिला और सबरा शरणार्थी कैंप में लेबनीज़ फ़्लेन्गिस्ट मिलिशिया के हाथों इन दंगों में 800 से ज़्यादा लोग मारे गए थे

पश्चिमी बेरुट उस समय इस्राइली सैनिकों के नियंत्रण में था, जब कट्टरपंथी इसाई चरमपंथी कैंप में घुस आए थे.

इस घटना में हुई जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि रक्षा मंत्री को इस बात का अंदाज़ा होना चाहिए था कि कट्टरपंथी कैंप में घुस कर क्या करने वाले थे.

जांच के बाद इस्राइल की सड़कों पर 3,00,000 लोग उतर आए और एरियल शेरॉन के इस्तीफ़े की मांग करने लगे.

भारी दबाव के बीच रक्षा मंत्री को इस्तीफ़ा देना ही पड़ा.

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