मुंबई में 'माई स्टैम्प' को लेकर उत्साह

Image caption योजना का मक़सद डाक टिकटों के संग्रह के शौक और ख़त लिखने के चलन को बढ़ावा देना है

डाक टिकट पर अपनी तस्वीर छपवाने का मौक़ा देने वाली भारत सरकार की अनूठी योजना 'माई स्टैम्प' का मुंबई के लोगों ने जमकर फ़ायदा उठाया है.

अधिकारियों का कहना है कि बीते शुक्रवार इस योजना को शुरु करने के बाद से अब तक 650 से ज़्यादा लोगों ने डाक टिकट पर अपनी तस्वीर छपवाने के लिए पंजीकरण कराया है.

अधिकारियों का कहना है कि और भी लोग इस योजना के तहत अपनी तस्वीर छपवाने के इच्छुक हैं.

योजना ये है कि कोई भी व्यक्ति महज 300 रूपए का भुगतान करके डाक टिकट पर अपनी तस्वीर छपवा सकता है. ये डाक टिकट पांच रूपए मूल्य की होगी.

ख़त लिखने का चलन

महाराष्ट्र में डाक सेवाओं की निदेशक आभा सिंह ने बीबीसी को बताया, ''आम लोगों से मिल रही प्रतिक्रियाओं ने हमें गदगद कर दिया है. माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, बच्चे और यहां तक की गांवों में रहने वाले लोग अपनी, अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की तस्वीर छपवाना चाहते हैं.''

उन्होंने बताया कि इस योजना का मक़सद डाक टिकटों के संग्रह के शौक और ख़त लिखने के चलन को बढ़ावा देना है.

डाक विभाग के अधिकारियों ने इच्छुक लोगों की तस्वीरें खींचने के लिए फ़ोटोग्राफ़रों की सेवाएं ली हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि 'माई स्टैम्प' योजना की शुरुआत सबसे पहले दिल्ली और भारत प्रशासित कश्मीर में की थी, लेकिन वहां के लोगों ने इतना उत्साह नहीं दिखाया जितना मुंबई में नज़र आ रहा है.

अनोखा तोहफ़ा

महाराष्ट्र में डाक सेवाओं की निदेशक आभा सिंह ने बीबीसी से कहा, ''बहुत सारे लोग अपनी तस्वीरों वाले इन डाक टिकटों को अपने नाती-पोतों को तोहफ़े के तौर पर दे रहे हैं.''

उन्होंने बताया कि 'माई स्टैम्प' योजना शनिवार को बंद हो गई और तब तक 3500 लोगों ने टिकटों पर अपनी तस्वीरें छपवाने के लिए 300 रूपए का भुगतान कर दिया था.

इन टिकटों पर आम लोगों की तस्वीरों की पृष्ठभूमि में स्मारक आदि होते हैं.

भारत के अन्य शहरों के मुक़ाबले मुंबई में इस योजना के ज़्यादा सफल होने की एक वजह शायद ये रही कि मुंबई देश की क़ारोबारी राजधानी होने के साथ ही मनोरंजन जगत का बड़ा केंद्र है.

साठ वर्षीय रानी पोद्दार उन चुनिंदा पहले लोगों में से एक हैं जिन्होंने डाक टिकट पर अपनी तस्वीर छपवाने के लिए भुगतान किया था.

उन्होंने इस तरह की ढाई हज़ार से ज़्यादा टिकटों का ऑर्डर दिया है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि उन्होंने दिल्ली में रहने वाले 15 साल के अपने पोते को हैरानी में डालने के लिए ये सब किया है.

उन्होंने कहा, ''मुझे अख़बारों से इस योजना के बारे में पता चला. मैं अपने पोते को बताना चाहती थी कि मैं अब भी उसे हैरत में डाल सकती हूं. मैं उसे अपनी तस्वीर वाली टिकट लगाकर ख़त भेजना चाहती हूं.''

भारत में डाक विभाग 1,55,000 डाकघरों का संचालन करता है जो दुनिया का सबसे बड़ा डाक तंत्र है. ज़्यादातर पोस्ट ऑफ़िस ग्रामीण इलाक़ों में हैं.

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