संयुक्त राष्ट्र में सीरिया पर नया प्रस्ताव

 शनिवार, 11 फ़रवरी, 2012 को 17:37 IST तक के समाचार
सीरिया

सीरिया के ख़िलाफ़ अरब लीग के एक प्रस्ताव को रूस और चीन ने वीटो कर दिया था

विरोध प्रदर्शन करने वालों के ख़िलाफ़ जारी हिंसा के बीच सीरिया की सरकार पर दबाव डालने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रयासों का केंद्र बनी हई है.

सभी तरफ से हिंसा को समाप्त करने और राष्ट्रपति बशर अल-असद के इस्तीफे की मांग को लेकर सऊदी अरब एक प्रस्ताव का मसौदा वितरित कर रहा है.

ये नया प्रस्ताव भी उसी प्रस्ताव के समान है जिसे पिछले दिनों रूस और चीन ने वीटो किया था और उनके इस क़दम से पश्चिमी ताकतें काफी नाराज़ हुई थीं.

लेकिन ताज़े मसौदे में गुजारिश के रूप में एक नया अंश यह है कि सीरिया में संयुक्त राष्ट्र का एक राजदूत नियुक्त किया जाए.

महासभा में सोमवार को सीरिया पर चर्चा होनी है जिसे संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मामलों के उचायुक्त नवी पिल्ले संबोधित करेंगे हालांकि तब तक उस प्रस्ताव पर वोट होने की संभावना नहीं है.

वीटो का अधिकार नहीं

महासभा में किसी के पास वीटो का अधिकार नहीं है हालांकि सुरक्षा परिषद की तरह महासभा के प्रस्तावों की कोई क़ानूनी बाध्यता भी नहीं है.

सऊदी अरब द्वारा प्रचलित किए जा रहा मसौदा पिछले साल प्रकाशित की गई अरब लीग की शांति की योजना का 'पूरी तरह समर्थन' करता है. इसके तहत असद को उप-राष्ट्रपति को सत्ता सौंपने के लिए कहा गया था.

सभी तरफ से हो रही हिंसा को रोकने की मांग करते हुए इस प्रस्ताव में मानवाधिकारों के 'उल्लंघन' के लिए ख़ासतौर पर सीरिया के अधिकारियों पर आरोप लगाया गया है.

मसौदे में मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह करने की भी बात की गई है हालांकि साफ तौर पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत का नाम नहीं लिया गया है.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून से अनुरोध किया गया है कि इस संकट का शांतिपूर्ण समाधान करने के लिए संयुक्त राष्ट्र एक राजदूत को नियुक्त करे. अरब लीग के महासचिव नबील अल-अरबी ने भी कुछ दिन पहले यह सुझाव दिया था.

गोलाबारी जारी

यह कदम उस वक्त उठाया गया है जब टैंकों और तोपखानों से होम्स के शहर पर गोलाबारी जारी है.

होम्स सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ है.

शुक्रवार को सुरक्षा बलों की गोलाबारी में होम्स में 16 और दमिश्क में 15 लोगों सहित देश में कम से कम 52 लोग मारे गए थे.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पिछले साल मार्च में आरंभ हुए विद्रोह में अब तक 7,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

सरकार का कहना है कि सशस्त्र गिरोहों और आंतकवादियों के हमलों में 2,000 से अधिक सुरक्षा कर्मी मारे जा चुके हैं.

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