इतिहास के पन्नों में 17 फरवरी

इतिहास के पन्ने पलटें तो 17 फरवरी का दिन कई वजहों से याद किया जाएगा. इसी दिन 1979 को चीन की सेना ने वियतनाम पर धावा बोल दिया. इसी दिन 1987 को ब्रिटेन में शरण लेने के लिए पहुंचे श्रीलंका के कुछ तमिलों ने हीथ्रो हवाई अड्डे पर अपने कपड़े उतारकर विरोध दर्ज किया.

1979: चीन ने वियतनाम पर धावा बोला

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Image caption वियतनाम के हमले से पहले, कम्बोडिया में पोल पॉट का शासन था. इस तस्वीर में वो अपने समर्थकों का नेतृत्व करते देखे जा सकते हैं.

17 फरवरी 1979 को चीन की सेना ने वियतनाम पर धावा बोल दिया. कई महीनों से चीन और वियतनाम की सीमा पर विवाद होने से दोनों देशों में तनाव की स्थिति बनी हुई थी.

वियतनाम के उप-विदेश मंत्री गुएन को ताच ने विभिन्न देशों के राजदूतों को हनोई में बताया कि चीन की सेना ने वियतनाम की सीमा पर बने लगभग सभी सैन्य अड्डों पर क़ब्ज़ा कर लिया.

चीन की तरफ से जारी किए गए एक बयान में कहा गया कि, "वियतनाम के हमलावरों को उचित जवाब देने के बाद, चीन शांति के लिए बातचीत करने को तैयार है."

चीन सरकार ने आरोप लगाया था कि पिछले छह महीनों में वियतनाम के सुरक्षा बल 700 बार चीन की सीमा में दाखिल हुए और आम जनता समेत 300 चीनी सैनिकों को घायल कर दिया.

विदेशी पर्यवेक्षकों के मुताबिक़ तीन हफ्तों में ही चीन ने वियतनाम की सीमा पर तीन सौ हवाई जहाज़ और डेढ़ लाख सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए.

वहीं वियतनाम के पास सैन्य बल काफी कम था क्योंकि क़रीब एक लाख सुरक्षाकर्मी कम्बोडिया और 25,000 लाओस में तैनात थे.

दरअसल 1978 में वियतनाम ने चीन के समर्थन वाली कम्बोडिया सरकार पर हमला कर दिया था और क्रिसमस के दिन कम्बोडिया पर क़ब्ज़ा कर लिया था.

वियतनाम की सीमा पर धावा बोलने के बाद, चीन के उप-प्रधानमंत्री डेंग ज़ियाओपेंग ने वियतनाम की सरकार को कम्बोडिया में दखल के लिए 'सज़ा' देने की धमकी दी.

1987: हीथ्रो हवाई अड्डे पर निर्वस्त्र हुए तमिल

Image caption ब्रिटेन में शरण लेने के लिए आए तमिल, जबरन वापस भेजे जाने का विरोध कर रहे थे.

17 फरवरी 1987 को ब्रिटेन में शरण लेने के लिए पहुंचे श्रीलंका के कुछ तमिलों ने हीथ्रो हवाई अड्डे पर अपने कपड़े उतारकर विरोध दर्ज किया.

एक बांग्लादेशी जहाज़ से एक हफ्ते पहले ब्रिटेन पहुंचे 64 तमिलों के समूह में से 12 पुरुषों ने कड़कड़ाती ठंड में अपने कपड़े उतार दिए.

सुरक्षा बलों ने ज़बरदस्ती उन्हें ढाका जाने के लिए तैयार एक विमान में बैठाया था. लेकिन उनके विरोध करने से विमान में बैठे अन्य यात्रियों ने शिकायत की और पायलट ने विमान उड़ाने से मना कर दिया.

इसके बाद उन पुरुषों को उतारकर महिलाओं और बच्चों के समूह को उड़ाने की तैयारी की गई. लेकिन उससे पहले ही उच्च न्यायालय का आदेश आ गया और सभी लोगों के देश से भेजे जाने पर एक हफ्ते के लिए रोक लगा दी गई.

ब्रितानी सरकार के मुताबिक ये सभी लोग गैर-कानूनी दस्तावेज़ों के सहारे देश में दाखिल हुए थे. सरकार का आरोप था कि दो महीनों में करीब 300 तमिल बगैर वीज़ा के ब्रिटेन में दाखिल हुए.

इस घटना के बाद मार्च 1987 में नए नियम लागू किए गए जिनके तहत पासपोर्ट और यात्रा से जुड़े अन्य दस्तावेज़ों के बगैर ब्रिटेन आने वाले हर व्यक्ति पर 1,000 पाउंड का जुर्माना होगा.

नए नियम लागू होने के बाद ब्रिटेन में शरण लेने के लिए आनेवालों की संख्या में भारी गिरावट आई.

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