बाल ठाकरे का मुंबई पर 'कब्जा' बरकरार

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Image caption मुंबई में कई सालों से शिव सेना का दबदबा रहा है

भारत के सबसे अमीर नगरीय निकाय बृहन्मुंबई महानगर पालिका के चुनावों के रुझानों के मुताबिक शिवसेना भाजपा गठबंधन बहुमत से भले दूर हो लेकिन वो एक बार फिर सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरे हैं.

शुक्रवार को मुंबई की 227 सीटों में से 108 सीटों पर शिवसेना-भाजपा-आरपीआई, 64 पर कॉंग्रेस और एनसीपी, 28 सीटों पर एमएनएस और 28 सीटों पर अन्य आगे हैं. मुंबई महानगर पालिका में सत्ता के लिए 114 सीटों की ज़रुरत होगी.

शुरुवाती रुझानों को देख कर लग रहा थी की शिव सेना से टूट कर अलग हुए राज ठाकरे शिव सेना से सौदेबाजी करने की हालत में आ गए हैं.

लेकिन जैसे जैसे मत पेटियां खुलती गईं वैसे ही स्पष्ट हुआ कि शिव सेना भारतीय जनता पार्टी निर्दलियों या छोटे दलों के साथ मिलकर अपना महापौर बनाने में कामयाब हो सकती हैं.

मुंबई की बृहन्मुंबई महानगर पालिका में कई साल से शिवसेना का दबदबा रहा है और वही पूरे प्रदेश में उसकी ताकत का सबसे बड़ा कारण भी माना जाता है.

मुंबई में 227 स्थानों के लिए 2232 प्रत्याशी अपना भाग्य अजमा रहे थे.'

इन चुनावों का महत्त्व

मुंबई महाननगर पालिका का सालाना बजट 20000 करोड़ रुपयों से ज़्यादा का है. यह बजट कई छोटे राज्यों के बजट से ज़्यादा है. मुंबई महानगर पालिका के चुनावों पर इसलिए भी लोगों की नज़र रहती है क्योंकि ऐसा माना जाता है की शिवसेना की राजनितिक ताकत का एक बड़ा कारण उसका मुंबई पर शासन है.

इन चुनावों का महत्त्व इसी से समझा जा सकता है की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चाव्हाण, एन सी पी के सुप्रीमो शरद पवार से लेकर शिव सेना के उम्रदराज़ सर्वेसर्वा बाल ठाकरे तक को अपनी पार्टियों के प्रचार केलिए सडकों पर उतरना पडा था.

इन चुनावों को एक तरह से महाराष्ट्र का मिनी विधान सभा चुनाव भी कहा जा सकता है क्यों की राज्य के अलग अलग हिस्सों में 10 बड़े शहरों में लोग अपने पार्षद चुन रहे थे.

अन्य चुनाव

मुंबई के अलावा महाराष्ट्र के पुणे, ठाणे , उल्हासनगर, पिंपरी चिंचवाड़, सोलापुर, नाशिक, अकोला, अमरावती और नागपुर में भी नगरीय निकायों के चुनाव हो रहे हैं.

इन सभी चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण मुंबई के चुनावों को माना जाता है क्योंकि अपने राजस्व व सदस्य आकार में वह सबसे बड़ा है.

दूसरी तरफ ठाणे से शिव सेना-भाजपा गठबंधन को 61 को सीटें प्राप्त हुई हैं. यहाँ सत्ता के लिए 65 सीटों की ज़रुरत होगी.

पिंपरी चिंचवड की 128 सीटों में से एनसीपी 84 सीटों के साथ सबसे आगे है.

सोलापुर की 102 सीटों में से कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को 61 सीटों पर विजय हासिल हुई है.

इसी तरह अकोला की 73 सीटों में से भाजपा शिवसेना गठबंधन को 26 सीटें मिली हैं जबकि कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को 23 सीटें मिली हैं. यहाँ सत्ता की चाबी छोटे दलों और निर्दलियों की जेब में है.

अमरावती में बहुमत के लिए ज़रूरी 44 सीटों में 42 कांग्रेस-एनसीपी के पास मौजूद हैं.

नाशिक में राज ठाकरे की एमएनएस सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरती दिख रही है.

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