सीरिया में मानवाधिकार उल्लंघन की निंदा

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Image caption सुरक्षा परिषद में भी इस प्रस्ताव पर वीटो हो चुका है

संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने एक प्रस्ताव में सीरिया में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की निंदा कर वहाँ पर हिंसा की समाप्ति की माँग की है.

इस पहल को अरब देशों का समर्थन हासिल था. इस प्रस्ताव में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद से इस्तीफ़ा देने की माँग की गई है.

सीरिया ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इससे संकट और बदतर होगा और ‘आतंकवादियों’ को बढ़ावा मिलेगा. इससे पहले चीन ने कहा था कि वह मसले का ‘शाँतिपूर्ण और उचित ’ हल निकालने के लिए अपने एक वरिष्ठ राजनयिक को सीरिया की राजधानी दमिश्क भेज रहा है.

अरब लीग समर्थित इस प्रस्ताव को मानने के लिए सीरिया बाध्य नहीं है. ये सुरक्षा परिषद के उस पुराने प्रस्ताव पर आधारित है जिसे रूस और चीन ने वीटो कर दिया था.

इस प्रस्ताव के समर्थकों को आशा है कि इससे सीरिया पर हिंसा समाप्त करने के लिए राजनीतिक दबाव बनेगा. ये प्रस्ताव मिस्र की तरफ़ से पेश किया गया था. उसने प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि वे इस पर एक मत हों ताकि सीरियाई सरकार को एक कड़ा संदेश भेजा जा सके.

इस पर सीरिया के राजदूत बशर जाफ़री का कहना था कि इससे संकट और बढ़ेगा और क्षेत्र में हिंसा को भी बढ़ावा मिलेगा.

रूस चीन और वेनेज़्वेला ने विरोध किया

जैसी की संभावना थी चीन और रूस ने एक बार फिर प्रस्ताव के विरोध में मत दिया. दोनों देश ज़बर्दस्ती सरकार बदलने की मुहिम का विरोध करते आए है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सैनिक हस्तक्षेप की संभावना पर भी अपनी चिंताएं ज़ाहिर की है.

मतदान से पहले रूस के उप-विदेश मंत्री जेनाडी गैटीलोव ने कहा कि यह प्रस्ताव संतुलित नहीं है इसलिए रूस इसका समर्थन नहीं करेगा.

रूसी मीडिया ने उनको कहते हुए बताया है कि ‘इसमें सारी माँगे सरकार से ही की गई हैं और विरोधियों से कुछ भी नहीं कहा गया है. ’

वेनेज़ुएला ने भी ये कह कर प्रस्ताव का विरोध किया कि इसमें सीरिया की संप्रभुता का ध्यान नहीं रखा गया है और इसके ज़रिए सीरिया में आंतरिक युद्ध को बढ़ावा देने की कोशिश हो रही है.

प्रस्ताव के पक्ष में 137 वोट पड़े जबकि 12 देशों ने इसका विरोध किया. 17 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया.

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