इतिहास के पन्नों में 22 फरवरी

इतिहास के पन्ने पलटें तो 22 फरवरी का दिन कई वजहों से याद किया जाएगा. इसी दिन वर्ष 1997 में दुनिया के पहले स्तनधारी जीव का क्लोन बनाने की घोषणा की गई. इसी दिन 1991 को तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इराक को कुवैत से अपनी सेना हटाने को कहा और धमकी दी कि ऐसा ना करने पर अमरीका इराक पर हमला कर देगा.

1997: भेड़ डॉली का 'क्लोन' बनाया गया

Image caption क्लोनिंग के ज़रिए बनाई गई भेड़ डॉली सात साल तक जीवित रही.

22 फरवरी 1997 को स्कॉटलैंड के रोसलिन संस्थान में शोधकर्ताओं की एक टीम ने पहली बार किसी स्तनधारी जीव से निकाली गई कोशिका से 'क्लोन' बनाने की घोषणा की.

ये 'क्लोन' भेड़ पांच जुलाई 1996 को पैदा हो गई थी लेकिन इसकी घोषणा फरवरी में ही की गई.

इससे पहले 'क्लोनिंग' भ्रूण कोशिकाओं से की गई थी. लेकिन इस बार वयस्क कोशिका का इस्तेमाल किया गया.

पैदा होने के बाद 'क्लोन' भेड़ को पहले एक कोड संख्या दी गई. फिर जब एक शोधकर्ता को पता चला कि क्लोन बनाने के लिए जिस कोशिका का इस्तेमाल किया गया, वो स्तन से ली गई थी, तो भेड़ का एक नाम रखा गया.

अभिनेत्री और गायिका डॉली पार्टन भी काफी हृष्ट-पुष्ट थीं और उनके नाम पर भेड़ का नाम डॉली रखा गया.

इस ऐलान के बाद विश्वभर में क्लोनिंग के ग़लत इस्तेमाल की आशंका पर बहस छिड़ गई. फरवरी 2003 में डॉली की मौत हो गई. अब डॉली को स्कॉटलैंड के नेशनल म्यूज़ियम की प्रदर्शनी में देखा जा सकता है.

1991: अमरीकी राष्ट्रपति ने इराक पर हमले की धमकी दी

Image caption 24 फरवरी को अमरीका ने सेना भेज कर इराक पर हमला कर दिया.

22 फरवरी 1991 के दिन तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इराक को कुवैत से अपनी सेना हटाने को कहा और धमकी दी कि ऐसा ना करने पर अमरीका इराक पर हमला कर देगा.

इराक ने इस धमकी को फौरन खारिज कर दिया.

अमरीका ने इराक को दो दिनों के भीतर युद्धबंदियों को छोड़ने के लिए भी कहा. उस वक्त इराक का नेतृत्व सद्दाम हुसैन के हाथ में था.

इराक ने अगस्त 1990 में कुवैत पर हमला कर कब्जा जमा लिया था. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र के समय-सीमा तय करने के बावजूद इराक ने कुवैत से अपनी सेनाएं नहीं हटाईं.

16 जनवरी 1991 में ऑपरेशन डेसर्ट स्टॉर्म शुरु हो गया. इसके तहत अमरीका, ब्रिटेन और सऊदी अरब ने लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों के जरिए इराक पर जबरदस्त हवाई हमले शुरू कर दिए.

एक महीने तक लगातार बमबारी के बाद, फरवरी में ज़मीन पर युद्ध छेड़ने की ये चेतावनी दी गई. चेतावनी के बाद भी हवाई हमले जारी रहे.

चेतावनी से 24 घंटे पहले इराक के कई तेल के कुओं में आग लगा दी गई. लाखों बैरल तेल समुद्र में बहा दिया गया. कई पर्यावरणविदों ने इससे भारी नुकसान की आशंकाएं जताईं.

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