सीरिया में भारी हिंसा: 'सौ मारे गए'

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Image caption सीरिया में पिछले 11 महीनों से सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं

सीरिया के विद्रोही कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी बलों के हाथों सौ से अधिक लोग मारे गए हैं. उनका कहना है कि ज्यादातर मौतें उत्तरी सीरिया में हुई हैं.

कम से कम 45 लोगों की मौत होम्स शहर में हुई भारी गोलाबारी में हुई है. ख़बरें हैं कि इदलिब प्रांत में राष्ट्रपति असद के सैनिकों ने हमला किया तो इससे भी अधिक लोग मारे गए हैं.

राजधानी दमिश्क के बाहरी इलाकों में भी हिंसा की खबरें हैं.

चूंकि विदेशी मीडिया पर सीरिया में प्रतिबंध लगा हुआ है इसलिए मारे गए लोगों की संख्या की स्वतंत्र रुप से पुष्टी नहीं हो सकी है.

रेडक्रॉस ने सरकार और विद्रोहियों से अपील की है कि वे हर दिन कुछ समय के लिए संघर्ष विराम करें जिससे कि घायलों के लिए दवा और इलाज का इंतजाम किया जा सके और नागरिकों को हिंसा वाले इलाके से निकलने का मौका मिल सके. लेकिन दोनों ही पक्षों की ओर से इस अपील पर सहमति के संकेत नहीं मिले हैं.

सरकार के खिलाफ 11 महीने पहले शुरु हुए विद्रोह में अब तक हजारों लोगों की जानें जा चुकी हैं.

विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीरियाई सुरक्षा बलों ने होम्स में हमले तेज कर दिए हैं.

उनका कहना है कि दो घंटों में सैकड़ों गोले बरसाए गए जिससे कई इमारतों को बुरी तरह से नुकसान हुआ है और बहुत सी जानें गई हैं.

माना जाता है कि होम्स के बाबा अम्र इलाके में बहुत से विद्रोहियों ने शरण ले रखी है. सुरक्षा बलों ने मंगलवार की सुबह से इसी इलाके को निशाना बनाया.

शहर के कई इलाकों में खाना और पानी उपलब्ध नहीं है. उस इलाके से एक कार्यकर्ता ने बीबीसी को बताया कि अब वहाँ रहना सुरक्षित नहीं रह गया है.

बैठक की तैयारियाँ

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Image caption सीरिया के विद्रोही भी हथियारों से लैस हैं

उधर पश्चिमी और अरब देश ट्यूनिशिया की राजधानी ट्यूनिस में शुक्रवार को सीरिया पर होने वाली बैठक की तैयारी कर रहे हैं.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि 'सीरिया के बहादुर लोगों को' समर्थन की ज़रुरत है और सीरिया के मित्रों की बैठक से साबित होता है कि राष्ट्रपति असद लगातार अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं.

उन्होंने सीरिया के ख़िलाफ़ पश्चिमी और अरब देशों के प्रस्ताव का विरोध करने के लिए रुस और चीन की निंदा करते हुए कहा कि इन दोनों देशों ने गलत कदम उठाया.

रूस ने कहा है कि वह शुक्रवार की बैठक में हिस्सा नहीं लेगा क्योंकि इसमें सीरिया को आमंत्रित नहीं किया गया है और इसमें सिर्फ एकतरफा बातचीत की जाएगी.

उसने प्रस्ताव किया है कि संयुक्त राष्ट्र को विशेष दूत भेजना चाहिए जो सीरिया में मानवीय सहायता की आपूर्ति का संयोजन कर सके.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब तक हिंसा में सात हजार लोग मारे जा चुके हैं.

जबकि सीरियाई सरकार का कहना है कि अब तक सुरक्षा बलों के 2000 लोग मारे जा चुके हैं.

सरकार रविवार को संविधान पर होने वाले जनमतसंग्रह पर जोर दे रही है जिसके आधार पर सरकार सुधार कार्यक्रम लागू करना चाहती है.

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