परमाणु कार्यक्रम: उत्तर कोरिया के फैसले का स्वागत

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Image caption करीब दो महीने पहले किम जोंग-इल की मौत के बाद उनके पुत्र किम जोंग-उन ने उत्तर कोरिया की गद्दी सभाली.

उत्तर कोरिया के परमाणु गतिविधियां और यूरेनियम संवर्धन रोकने के फैसले का अमरीका और चीन ने स्वागत किया है.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्नी ने कहा कि उत्तर कोरिया का ये कदम कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियार रहित करने की दिशा में एक ‘सकारात्मक’ कदम है.

ये फैसला पिछले सप्ताह अमरीकी और उत्तर कोरियाई राजनयिकों के बीच बीजिंग में बैठक के बाद लिया गया है.

उत्तर कोरिया के इस फैसले के बदले अमरीका ने उसे 2,40,000 टन खाद्य उत्पाद देने की घोषणा की है.

उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने प्योंगयांग में बुधवार को एक बयान जारी कर इस फैसले की पुष्टि की.

बयान में कहा गया, “ये फैसला दोनों देशो के बीच रिश्तें सुधारने और भरोसा बढ़ाने के लिए लिया गया है.”

संयंत्र का निरीक्षण

अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उत्तर कोरिया संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को अपने योंगब्योन स्थित परमाणु संयंत्र में भी जाने देने को सहमत हो गया है.

कार्नी ने कहा, “ये पुख्ता कदम है और हमें लगता है कि ये कोरियाई प्रायद्वीप से परमाणु हथियारों को पूरी तरह से हटाने की ओर एक सकारात्मक पहला है.”

उन्होंने कहा, “लेकिन निश्चित ही उन्हें क्रियान्वित किए जाने की जरूरत है. इसलिए हम इस नीतिगत फैसले को उसी तरह की सोच से आगे ले जाएंगे.”

हालांकि विशेषज्ञ अभी भी इस बात को लेकर चिंतित है कि उत्तर कोरिया में योंगब्योन के अलावा दूसरे गुप्त ठिकानों में भी यूरेनियम संवर्धन के संयंत्र लगे हो सकते है.

इस फैसले से दो ही महीने पहले किम जोंग-इल की मौत हो गई थी जिसके बाद उनके पुत्र किम जोंग-उन ने अपने पिता की गद्दी सभाली.

संवाददाताओं का कहना है कि ये फैसला उत्तर कोरिया के साथ छह सदस्यीय परमाणु निशस्त्रीकरण समझौते का रास्ता खोल सकता है, जिससे साल 2009 में उत्तर कोरिया बाहर चला गया था.

खाद्य पदार्थों की कमी

Image caption विशेषज्ञ इस बात पर चिंतित है कि उत्तर कोरिया में योंगब्योन के अलावा दूसरे गुप्त ठिकानों पर भी यूरेनियम संवर्धन के संयंत्र लगे हो सकते है.

चीन ने भी उत्तर कोरिया के इस कदम का स्वागत किया है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने कहा कि परमाणु गतिविधियों को रोकने के फैसले से कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी.

इससे पहले एक अमरीकी सैन्य अधिकारी ने कहा था कि उत्तर कोरिया को खाद्य सहायता देने का फैसला राजनीतिक समझौते के आधार पर होगा.

उत्तर कोरिया में 1990 के दशक में आई प्राकृतिक आपदाओं के बाद से ही खाद्यान्नों की कमी है. वो अपनी जनता की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी सहायता पर ही निर्भर है.

राजनीतिक छूट और विदेशी सहायता लेने के लिए उत्तर कोरिया साल 2005 में अपने परमाणु हथियारों के मंसूबों को त्यागने को तैयार हो गया था. इस समझौते में दोनों कोरियाई देशों के अलावा अमरीका, चीन, रूस और जापान शामिल था.

लेकिन ये समझौता शुरू होने के बाद साल 2009 में ही टूट गया.

अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच दोबारा बातचीत जुलाई 2011 में शुरू हुई.

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