अमरीकी सम्मान से चकित हैं विवेक वाधवा

विवेक वाधवा
Image caption विवेक वाधवा को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उन्हें ये सम्मान मिलेगा.

भारतीय मूल के अमरीकी प्रोफ़ेसर और तकनीकी क्षेत्र के माहिर विवेक वाधवा को बेहतरीन अमरीकी अवार्ड से सम्मानित किए जाने की सूचना देने के लिए जब अमरीकी आप्रवासन विभाग के निदेशक ने उन्हे ख़ुद फ़ोन किया तो विवेक वाधवा को बड़ी हैरानी हुई.

विवेक वाधवा कहते हैं, “मैं समझता था कि अमरीका कभी भी मुझे धक्के मारकर बाहर निकाल देगा क्यूंकि मैं तो इसकी नीतियों की कड़ी आलोचना करता रहा हूं. लेकिन मैं बहुत हैरान था जब अमरीकी आप्रवासन अधिकारी एलेक्ज़ांडर मयोरका का फ़ोन आया. उन्होंने बोला, हम आपकी सारी उपलब्धियों और अमरीका को बेहतर बनाने के लिए काम करने के लिए आपके बहुत एहसानमंद हैं.”

वह कहते हैं, “मैं हैरान था क्यूंकि मैं अमरीका की आप्रवासन नीतियों की बहुत आलोचना करता रहा हूं. उनको कहता रहा हूं कि उनकी नीतियों के कारण बहुत अच्छे लोग देश छोड़ कर जा रहें हैं, क्यूकि यहां पर वीज़े नहीं मिलते.”

किसी अन्य देश से आकर अमरीका का नागरिक बनने वाले उन लोगो को यह अवार्ड दिया जाता है जो किसी भी क्षेत्र में अमरीका की बेहतरी के लिए विशेष काम करें.

इससे पहले पेप्सी की सीईओ भारतीय मूल की इंदिरा नूई को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

विवेक वाधवा ने 1989 में अमरीका की नागरिकता हासिल की थी.

दिल्ली में जन्में विवेक वाधवा अब कैलीफॉर्निया में रहते हैं. वह अमरीका की ड्यूक, एमोरी और सिंग्यूलर यूनिवर्सिटियों में अमरीकी नीतियों के बारे में पढ़ाते हैं, जिसमें तकनीकी क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर ज़ोर रहता है. और इन नीतियों को बेहतर बनाने के लिए वह शोध भी करते हैं.

यूनिवर्सिटी में पढ़ाना शुरू करने से पहले उन्होंने अपनी खुद की दो सॉफ़्टवेयर कंपनियां भी शुरू की थीं.

वह कई अमरीकी समाचार पत्रों जैसे 'वाशिंगटन पोस्ट' और 'ब्लूमबर्ग बिज़नेस वीक' में लेख भी लिखते हैं.

और कई वर्षों से वह अमरीका की आप्रवासन नीतियों की आलोचना करते रहें हैं.

उनका कहना है कि अमरीका में भारत जैसे देशों से जो लोग पढ़ाई करने आते हैं उन्हें यहां पर रहने और काम करने के लिए वीज़ा मिलने में बहुत अधिक परेशानी होती है जिसके कारण बहुत से ऐसे प्रतिभाशाली लोग देश छोड़कर अपने देशों को या फिर कोई और देश चले जाते हैं.

विवेक वाधवा समाचार पत्रों में लेख लिखकर या बड़ी-बड़ी कांफ़्रेंस में भाषण देते हुए यही मुद्दा उठाते रहते हैं.

वे अमरीकी सरकार को समझाने की कोशिश करते रहते हैं कि ये अमरीका के भी फ़ायदे में है कि भारत जैसे देशों से आने जिन लोगों ने अमरीका में उच्च शिक्षा पाई हो, उन्हें वीज़ा मुहैय्या कराके अमरीका में ही रहने दिया जाना चाहिए.

विवेक मानते हैं कि इससे अमरीका में और नौकरियां पैदा होंगी और अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी.

Image caption विवेक वाधवा को उम्मीद है कि भारतीय मूल का आदमी भी अमरीका का राष्ट्रपति बन सकता है.

विवेक वाधवा कहते हैं, “दुनिया भर के प्रतिभाशाली प्रोफ़ेशनल्ज़ अमरीका आते हैं और जब उन्हें वीज़े नहीं मिलेंगे तो यह लोग तो भारत या कोई और देश चले जाएंगे और वहां भी अच्छी नौकरी करेंगे और अपनी कंपनी शुरू कर लेंगे, लेकिन इससे अमरीका को ही घाटा होगा.”

भारतीय मूल के लोग

विवेक कहते हैं कि भारतीय मूल के लोगों ने पिछले कोई एक दशक में अमरीका में बहुत तरक्की की है.

सिलिकान वैली में अब हर सात में से एक कंपनी किसी भारतीय मूल के व्यक्ति ने ही शुरू की है. और अब भारतीय मूल के लोग अमरीकी समाज का ही हिस्सा हो गए हैं.

अमरीका में दो दशकों से अधिक समय से रहते हुए विवेक वाधवा ने कई उतार चढ़ाव भी देखे हैं.

सालों पहले की बात याद करते हुए वह कहते हैं, “पहले तो अमरीका में भारतीय मूल के लोगों को देखकर अमरीकी समझते थे कि ये एक ग़रीब देश से आए हुए लोग हैं, लेकिन अब भारतीय मूल के लोगों को देखकर यही ख्याल आता है कि यह कोई सीईओ होंगे, इंजिनियर, वैज्ञानिक या डॉक्टर होंगे. हमारी साख बहुत सुधर गई है और अब हम लोगों को बहुत मान मिलता है क्यूंकि हम लोगों ने बहुत तरक्की कर ली है.”

भारत में पैदाईश तो हुई लेकिन विवेक वाधवा का अधिकतर समय भारत से बाहर ही गुज़रा है.

भारत के बारे में उनकी सुनहरी यादें हैं, वह कहते हैं कि वहां लोगों से बहुत प्यार मिलता है. बॉलीवुड फ़िल्में भी वह बड़े शौक से देखते हैं. और वह अपने पूरे परिवार के साथ अक्सर भारत जाते रहते हैं.

'राजनीति में आएं'

वह कहते हैं कि अमरीका में भेदभाव की भी मुश्किलें तो हैं लेकिन तरक्की की राह में आड़े नहीं आती हैं. और उसके लिए वह अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का भी उदाहरण देते हैं.

विवेक वाधवा कहते हैं, "अमरीका में नस्ल के आधार पर भेदभाव तो है लेकिन उसके बावजूद आप आगे बढ़ सकते हैं. अमरीका बहुत महान देश है यहां सब तरक्की कर सकते हैं. एक अफ़्रीकी अमरीका का राष्ट्रपति बन गया, तो भारतीय मूल के लोग क्यूं नहीं बन सकते. मैं अपने बच्चों को भी यही कहता हूं कि वह तरक्की करें, राजनीति में भी आगे बढ़ें, सांसद बनें, कांग्रेस में जाएं, और यहां तक की राष्ट्रपति भी बनने की कोशिश करें. यहां सब कुछ मुमकिन है.”

अमरीका में बेहतरीन अमरीकी अवार्ड सम्मानित किए जाने के बाद अब विवेक वाधवा का उत्साह और बढ़ गया है. वह कहते हैं कि अब वह अमरीका की नीतियों को ख़ासकर आप्रवासन नीतियों को सुधरवाने के लिए और ज़ोरदार मुहिम चलाएंगे और देश की प्रगति के लिए काम करते रहेंगे.

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