मकड़ी के जाले से निकलेगा संगीत

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Image caption वायलिन के हर एक तार को बनाने के लिए हजारों धागों का इस्तेमाल किया गया.

जापान के एक शोधकर्ता ने मकड़ी के बुने हुए जाल के हजारों रेशमी धागों का इस्तेमाल कर वायलिन के तार बनाए हैं.

बताया जा रहा है कि स्टील से बने तारों के मुकाबले इन तारों से निकलने वाली आवाज हल्की और गहरी सुनाई देती है.

इसकी वजह तार बनाने की विधि में हो सकती है, क्योंकि तार में मकड़ी के रेशमी धागों को जिस तरह से मोड़ा गया है उससे उनके बीच में कोई जगह नहीं बचती.

जापान के नारा मेडिकल विश्वविद्यालय के डॉ. ओसाकी ने वायलिन का एक-एक तार मकड़ी के बुने हुए हजारों रेशमी धागों से बनाया है.

डॉ ओसाकी ने कहा, “मकड़ी के रेशम से वायलिन के तार बनाना एकदम नई खोज है और ये वायलिन बजानेवालों और संगीतप्रेमियों को नए सुर सुनने का मौका देगी.”

300 मकड़ियों का इस्तेमाल

डॉ ओसाकी कई वर्षों से स्पाइडर के रेशम पर शोध कर रहे हैं. उन्होंने पाली हुई मकड़ियों का प्रजनन करवाया और उनसे खास ‘ड्रैगलाइन रेशम’ निकालने का तरीका विकसित किया.

करीब 300 ‘नेफ्युला माकुलाता’ मकड़ियों से ये रेशमी धागे निकाले गए. ऐसे 3,000 से 5,000 धागों को एक दिशा में मोड़कर एक गट्ठा बनाया गया, और फिर तीन गट्ठों को दूसरी दिशा में एक-साथ मोड़कर एक तार बनाया गया.

जांच करने पर पाया गया कि मकड़ी के रेशम से बने ये तार, ऐल्मूनियम की परत से ढके नायलॉन के तारों से ज्यादा मजबूत हैं.

अब डॉ ओसाकी मकड़ी के रेशम के इस्तेमाल के नए तरीकों पर काम कर रहे हैं. वायलिन के तार बनाने पर उनके इस शोध को ‘फिसिकल रिव्यू लेटर्स’ पत्रिका के अगले संस्करण में प्रकाशित किया जाएगा.

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