मिस्र:'कौमार्य परिक्षण' करने वाला डॉक्टर बरी

समीरा इब्राहिम
Image caption समीरा इब्राहिम ने मिस्र में आंदोलन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के कौमार्य परिक्षण को कानूनन चुनौती दी.

मिस्र में सेना की एक अदालत ने उस डॉक्टर को बरी कर दिया है जिस पर महिला प्रदर्शनकारियों का ज़बरदस्ती 'कौमार्य परिक्षण' करने का आरोप था.

सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक़ जज ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास होने की वजह से सेना में डॉक्टर अहमद आदेल को बरी कर दिया.

डॉक्टर को बरी करने के फ़ैसले का विरोध करने के लिए प्रदर्शनकारी अदालत के बाहर जमा हुए.

मामला

ये मामला समीरा इब्राहिम नाम की एक महिला अदालत ले गई थीं. समीरा का कहना था कि पिछले साल विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में ली गई महिलाओं का 'परीक्षण' किया गया था.

राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के सत्ता से हटने के हफ़्तों बाद इस मामले के ख़िलाफ़ उस समय आवाज़े उठीं जब समीरा इब्राहिम और कई अन्य महिलाओं ने बताया कि उनके साथ ऐसा बर्ताव मार्च 2011 में तहरीर चौक पर एक विरोध प्रदर्शन के बाद हिरासत में किया गया.

इन महिलाओं का कहना था कि जब वो हिरासत में थीं तब सेना ने एक पुरुष डॉक्टर द्वारा पांच मिनट लंबे तथाकथित कौमार्य परीक्षण के लिए उन्हें मजबूर किया.

पहले सेना ने इस आरोप को नकार दिया था लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशनल संस्था के अनुसार बाद में सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुप्त रूप से माना कि ऐसे परीक्षण किए गए थे.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption काहिरा के तहरीर चौक पर मार्च 2011में प्रर्दशनों के बाद राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को सत्ता छोड़नी पड़ी थी.

भविष्य में ऐसे परीक्षणों को रोकने के लिए समीरा इब्राहिम ने कानूनन इसे चुनौती दी और काहिरा की एक प्रशासनिक अदालत ने आखिरकार इन परीक्षणों को अवैध करार दिया था.

'मिस्र के सम्मान पर दाग़'

काहिरा से बीबीसी संवाददाता का कहना था, डॉक्टर अहमद आदेल के मामले की सुनवाई से पहले समीरा इब्राहिम ने दावा किया थी कि जिन गवाहों से उन्हें अपने पक्ष में गवाही देने की उम्मीद थी, उन्होंने आखिरी क्षणों में अपनी कहानी बदल दी.

मिस्र की सरकारी समाचार एजेंसी, मेना, के अनुसार मामले की सुनवाई जज ने कहा कि फ़ैसला, दस्तावेज़ों से साबित हो रही बातों और उनके अंत:करण पर आधारित था. जज ने ये भी कहा कि उन पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं था.

लेकिन समीरा इब्राहिम ने ट्विटर पर लिखा कि इस फ़ैसले से मिस्र के सम्मान पर दाग़ लगा है और जब तक वो 'मिस्र के अधिकार बहाल' नहीं कर देतीं, वो नहीं रुकेंगी.

काहिरा से बीबीसी संवाददाता जॉन लेन का कहना है कि मिस्र में आंदोलन के दौरान जिन पुलिसकर्मी या सैनिकों पर प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप था, उन्हें सज़ा दिलाना बहुत मुश्किल रहा है.

संबंधित समाचार