अमरीका और चीन के बीच 'नई जंग'

Image caption दुर्लभ खनिज पदार्थों के निर्यात पर चीन की नीति की अमरीका और अन्य कारोबारी साझेदार आलोचना करते रहे हैं

चीन के विदेश मंत्रालय ने देश से उन दुर्लभ खनिज पदार्थों के निर्यात पर प्रतिबंध के फैसले का बचाव किया है, जो हाईटेक उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

ये बयान ऐसे वक्त आया है जब अमरीका चीन के खिलाफ इस मामले में विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) में मुकदमा दायर करने की तैयारी कर रहा है.

धरती पर पाए जाने वाले दुर्लभ खनिज पदार्थों का 95 फीसदी से ज्यादा हिस्सा चीन में पाया जाता है.

आईफोन और इलेक्ट्रिक कार समेत कई उत्पादों में इनका इस्तेमाल होता है.

अमरीका बनाम चीन

अमरीका का तर्क है कि चीन अपना आयात सीमित करके दुनियाभर में इन उत्पादों की कीमतें बढ़ा रहा है.

लेकिन चीन का कहना है कि उसने जो प्रतिबंध लगाया है, वो विश्व व्यापार संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है.

चीन का ये भी कहना है कि दिशा-निर्देशों में जो व्यवस्था की गई है, उसका मकसद पर्यावरण को अंधाधुंध खनन से होने वाले नुकसान से बचाना है.

वहीं आचोलकों का कहना है कि अपने घरेलू उत्पादन को नाजायज फायदा पहुंचाने के लिए चीन घरेलू बाजार में कीमतों को कम रख रहा है.

चीन इससे इनकार करता है लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब दुर्लभ खनिज पदार्थ राजनीतिक मुद्दा बने हों.

एक वर्ष से भी ज्यादा समय पहले राजनयिक तनातनी की वजह से चीन ने जापान को होने वाले निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी.

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