इतिहास के पन्नों में 16 मार्च

अगर इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो पाएंगे कि आज के दिन ही इराक में जहरीली गैस से हजारों लोगों की मौत हो गई थी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हैरल्ड विल्सन ने अपने पद से अचानक इस्तीफे की घोषणा कर दी थी.

1988: हलबजा गैस हमले में हजारों मौतें

Image caption हलबजा कुर्द बाहुल्य इलाका था जहां सालों से स्वायत्ता की मांग उठ रही थी.

आज ही के दिन 1988 में उत्तरी इराक के एक कुर्द आबादी वाले शहर पर हुए गैस हमले में हजारों लोगों की मौत हो गई थी जबकि काफी लोग घायल थे.

ऐसा माना जाता है कि 20 हवाई जहाजों ने हलबजा के ऊपर स्थानीय समय ग्यारह बजे उड़ान भरी थी.

विश्लेषकों के अनुसार विमानों से गिराए गए रसायनों में मस्टर्ड गैस, नर्व एजेंट सरीन, तबुन और शायद साइनाईड शामिल थे.

ये हलबजा पर उन दिनों में किए गए हमलों में से एक था. इराक-ईरान युद्ध के दौरान इरान ने हलबजा पर कब्जा कर लिया था.

कहा गया था कि इराक हलबजा के निवासियों को सबक सिखाना चाहता था. हलबजा में कुर्दो की खासी आबादी थी और वो लंबे समय से स्वायत्ता की मांग कर रहे थे.

विमान हमलों के पहले पास के पहाड़ी क्षेत्र से शहर पर रोकेटों से हमले किए गए थे.

हलबजा में मौजूद कुर्द कमांडर के मुताबिक विमानों ने शहर के ऊपर चौदह चक्कर लगाए. उनके अनुसार हर ग्रुप में सात से आठ हवाई जहाज शामिल थे्.

चश्मदीदों का कहना था कि रसायनों के गिराए जाने के बाद शहर में कई जगहों से 150 फूट ऊंचे धुंए के बादल आसमान की तरफ उड़ रहे थे.

कहा जाता है कि जो लोग इस हमले का शिकार हुए उनमें तकरीबन 75 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे थे.

1976: प्रधानमंत्री हैरल्ड विल्सन का त्यागपत्र

Image caption हैरल्ड विल्सन के इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों को स्तब्ध कर दिया था.

आठ सालों तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और 13 वर्षों तक लेबर पार्टी के नेता रहे, हैरल्ड विल्सन ने त्यागपत्र देकर सबको चौंका दिया था.

पांच दिनों पहले ही अपना साठवां जन्मदिन मना चुके विल्सन ने त्यागपत्र की घोषणा मंत्रिमंडल की बैठक में की.

हैरल्ड विल्सन ने कहा कि मैं अपने फैसले पर अडिग हूं और इसमें कोई बदलाव नहीं आएगा.

लोगों के इस बारे में तब पता चला जब प्रधानमंत्री महारानी से मिलने बकिंघम पैलेस गए. हालांकि समझा जाता है कि उन्होंने महारानी को अपने फैसले के बारे में महीनों पहले ही बता दिया था.

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस्तीफे का फैसला उन्होंने दो साल पहले ले लिया था.

उन्होंने कहा कि वो निचले सदन में सलाहकार के तौर पर काम करते रह सकते हैं लेकिन वो सरकार के फैसलों में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेंगे.

जैसे ही प्रधानममंत्री ने त्यागपत्र की घोषणी की उसके बाद कैबिनेट ने बयान जारी कर कहा कि वो इस फैसले से हैरान है और बहुत दुखी है.

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