इतिहास के पन्नों में मार्च 17

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पाएगें की इसी दिन साल 2011 में संयुक्त राष्ट्र ने इसी दिन लीबिया में नो फ्लाई ज़ोन बनाने हेतु एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई. साल 1978 में आज के दिन दक्षिणी लेबनान पर इसरायल के हमले के चलते हजारों फ़लस्तीनीयों को अपने घर बार छोड़ कर भागना पडा था.

2011 : लीबिया के ऊपर नो फ्लाय ज़ोन बनाने को मंज़ूरी

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Image caption अन्तोगत्वा इस प्रस्ताव के कारण गद्दाफी की समर्थक सरकार का पतन हुआ

साल 2011 में इसी रोज़ संयुक्त राष्ट्र महासंघ की सुरक्षा परिषद् ने प्रस्ताव क्रमांक 1973 को पास कर दिया था. सुरक्षा परिषद् में यह प्रस्ताव फ़्रांस, लेबनान और ब्रिटेन ने रखा था.

इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद् के दस सदस्यों ने समर्थ किया था. भारत, ब्राजील, जर्मनी, चीन और रूस ने मतदान में भाग नहीं लिया था. किसी भी देश ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान नहीं किया था.

इस प्रस्ताव का आधार बना कर पश्चिमी देशों ने लीबिया में चल रहे गृह युद्ध में हस्तक्षेप किया और लीबिया में कर्नल मुम्मर गद्दाफी के प्रभुत्व वाली सरकार को गिरा दिया.

इस प्रस्ताव में यह कहा गया था लीबिया में एक नो फ्लाय ज़ोन बनाने की बात की गयी थी ताकि गद्दाफी के जंगी जहाज़ आम लोगों और विद्रोहियों पर बमबारी ना कर सकें.

संयुक्त राष्ट्र ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस बात का अधिकार दिया था की वो लीबिया में आम लोगों की जानें बचाने के लिए लीबिया पर कब्ज़ा करने को छोड़ कर सभी ज़रूरी कदम उठायें.

इस प्रस्ताव के बाद अमरीका, फ़्रांस और ब्रिटेन के जहाजों ने लीबिया के ऊपर बमबारी शुरू कर दी. ना केवल लीबिया के हवाई जहाजों उड़ने के नाकाबिल बना दिया गया बल्कि गद्दाफी समर्थक सेनाओं के बड़े हथियारों पर भी बम बरसाए गए. इसके अलावा सीरिया में गद्दाफी के खिलाफ लड़ रहे लोगों को हथियार भी दी गए.

रूस और चीन इस कार्रवाई से कतई संतुष्ट नहीं थे और उनका मानना था की पश्चिमी देश स्वीकृत प्रस्ताव से कहीं ज़्यादा आगे बढ़ कर काम किया है जो की सही नहीं है.

अन्ततोगत्वा गद्दाफी की समर्थक सरकार का पतन हुआ.

1978 : लेबनान इसरायली हमलों के बाद हजारों फलस्तीनियों का पलायन

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Image caption इसरायल ने फलस्तीनी लड़ाकों के ऊपर आरोप लगाया था की वो दक्षिणी लेबनान में अड्डे बना कर इसरायल में आम लोगों के ऊपर हमले कर रहे हैं.

इसी दिन दक्षिण लेबनान पर इसरायल के हमले के तीसरे दिन लेबनान में रह रहे हजारों हज़ार फलस्तीनी आम नागरिक अपने बसेरे छोड़ कर भागने को मजबूर हो गए.

दक्षिणी लेबनान से लौरियों, बसों और तमाम दुसरे साधनों से फलस्तीनी लेबनान की राजधानी बेरूत की तरफ भाग चले क्योंकि इसरायल लेबनान में अन्दर ही अन्दर घुसता चला आ रहा था.

एक तरफ तो पूरी दुनिया की तरफ से इस लड़ाई को रोकने के लिए प्रयास हो रहे थे दूसरी तरफ इसरायल लेबनान में बम बरसा रहा था. कई पुत्रे के पूरे मोहल्ले इसरायली बमबारी के चलते नेस्तनाबूद हो गए.

इसके पहले मार्च 11 को इसरायल के तेल अवीव में एक बस का अपहरण कर लिया गया था जिसमे 35 लोगों की मौत हो गयी थी और करीब लोग घायल हो गए थे. इसरायल ने इस घटना का बदला लेने के लिए दक्षिण लेबनान पर हमला बोला था.

इसरायल ने फलस्तीनी लड़ाकों के ऊपर आरोप लगाया था की वो दक्षिणी लेबनान में अड्डे बना कर इसरायल में आम लोगों के ऊपर हमले कर रहे हैं.