निजी सुरक्षा कंपनियों पर गाज गिरने से चिंता

Image caption विदेशी राजनयिकों को आशंका है कि अफगानिस्तान के सुरक्षाबल अपनी जिम्मेदारी ठीक तरह से शायद ही निभा पाएंगे

अफगानिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मामलों के मंत्रालय ने देश में काम कर रही निजी सुरक्षा कंपनियों को अपना कामकाज इस बुधवार तक बंद करने के लिए कहा है.

अफगानिस्तान की सरकार कई बार इसकी मियाद बढ़ाती रही है.

लेकिन काबुल स्थित बीबीसी संवाददाता बिलाल सरवरी का कहना है कि मंत्रालय की इस घोषणा से वहां काम कर रहे अंतरराष्ट्रीय सहायताकर्मियों और राजनयिक मिशनों की चिंता बढ गई है.

राष्ट्रपति हामिद करजई ने अगस्त 2009 में दूसरी बार जब चुनाव लड़ा था, तब उन्होंने जो चुनावी वादे किए थे, उनमें निजी सुरक्षा कंपनियों को खत्म करना एक प्रमुख मुद्दा था.

हामिद करजई ने तब कहा था कि निजी सुरक्षा कंपनियां, सुरक्षा तंत्र के समांतर काम करने लगी हैं जिसकी वजह से अफगान सुरक्षा बलों के विकास में बाधा आ रही है.

फैसले का स्वागत और चिंता

अफगानिस्तान के लोगों ने आमतौर पर इस कदम का स्वागत किया है.

लेकिन अंतरराष्ट्रीय मदद एजेंसियां, गैर-सरकारी संगठन और विदेशी मिशनों का कहना है कि निजी सुरक्षा एजेंसियों की गैर-मौजूदगी में उनका काम करना मुश्किल हो जाएगा.

बुधवार से अफगानिस्तान में कई सुरक्षा एजेंसियों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा. इनमें वो एजेंसियां भी शामिल हैं जो दूतावासों के साथ-साथ सैन्य ठिकानों को भी सुरक्षा प्रदान करती हैं.

इनमें वो कंपनियां भी शामिल हैं जिन्होंने जोखिम प्रबंधन करने वाली कंपनियों के तौर पर नए लाइसेंस हासिल किए थे.

ये मुद्दा इतना संवेदनशील हो गया है कि खुलकर बोलने के लिए चंद लोग ही राजी होते हैं.

अफगानिस्तान में काम करने का अच्छा-खासा अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पश्चिमी राहतकर्मी ने बीबीसी को बताया कि निजी सुरक्षा कंपनियां अमरीका और तालिबान के बीच बफर का काम करती हैं.

उनका कहना है कि राहत एजेंसियां कम सुरक्षा की वजह से अगर अफगानिस्तान से चली गईं तो मुल्क को अरबों डॉलर की विकास परियोजनाओं से हाथ धोना पड़ेगा.

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