इतिहास के पन्नों में 25 मार्च

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पता चलता है कि 25 मार्च को कई अहम घटनाएं घटीं थीं.

1980: ब्रिटेन ने मॉस्को ओलंपिक में शामिल होने का फैसला किया

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Image caption ब्रितानी सरकार ने मॉस्को ओलंपिक खेलों का बहिष्कार किया था.

आज ही के दिन 1980 में ब्रिटेन ओलंपिक संघ ने ब्रितानी सरकार के विरोध और दबाव के बावजूद उसी साल जूलाई में मॉस्को में होने वाले ओलंपिक खेलों में शामिल होने का फैसला किया था.

ब्रिटेन के 15 खेल संघों ने ओलंपिक में शामिल होने का फैसला किया था लेकिन हॉकी संघ ने इसका विरोध किया था.

ब्रितानी सरकार मॉस्को ओलंपिक खेलों का बहिष्कार कर रही थी क्योंकि तत्कालीन सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला किया था और वहां अपनी सेना भेज दी थी.

अमरीका और ब्रिटेन समेत कई पश्चिमी देशों ने इसी कारण मॉस्को में होने वाले ओलंपिक खेलों का बहिष्कार करने का फैसला किया था.

लेकिन इसके जवाब में ब्रिटेन ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सर डेनिस का कहना था, ''ब्रितानी सरकार के पक्ष से मुझे पूरी हमदर्दी है लेकिन हमारा मानना है कि खेल को एक पुल की तरह जोड़ने का काम करना चाहिए ना कि तोड़ने का.''

ब्रिटेन सरकार ओलंपिक संघ के फैसले पर खेद जताते हुए ब्रितानी सरकार के किसी भी अधिकारी को मॉस्को नहीं भेजने का फैसला किया था और ना ही ब्रितानी खिलाड़ियों को ब्रितानी सरकार की तरफ से कोई आर्थिक मदद देने का फैसला किया था.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने भी कई देशों के बहिष्कार करने के फैसले की निंदा की थी और कहा था कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने उन खिलाड़ियों का खर्च भी उठाया था जिनके देशों ने मॉस्को ओलंपिक में नहीं जाने का फैसला किया था.

1975: सऊदी अरब के शासक शाह फैसल की हत्या

आज ही के दिन 1975 में सऊदी अरब के तत्कालीन शासक शाह फैसल की उनके ही भतीजे राजकुमार फैसल बिन मुसाद ने हत्या कर दी थी.

राजकुमार फैसल बिन मुसाद ने शाह फैसल को करीब से तीन गोलियां मारी थीं. शाह फैसल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.

चश्मदीदों के अनुसार राजकुमार मुसाद शाह फैसल के कमरे के बाहर इंतजार कर रहे थे और एक कुवैती दल से बातचीत कर रहे थे जो शाह फैसल से मिलने आया था.

फिर जैसे ही राजकुमार शाह फैसल के कमरे में दाखिल हुए बादशाह अपने भतीजे को गले लगाने के लिए आगे बढ़े. इतने में राजकुमार फैसल बिन मुसाद ने अपनी पिस्तौल निकाली और उन पर फायर कर दिया.

बादशाह के एक अंगरक्षक ने राजकुमार पर तलवार से हमला किया लेकिन जल्दी में तलवार मयान से बाहर नहीं निकल सकी.

तभी वहां मौजूद तेल मंत्री शेख यमनी ने अंगरक्षक को चिल्ला कर कहा कि वो राजकुमार को ना मारे. राजकुमार को अंगरक्षकों ने पकड़ लिया.

बाद में जून 1975 में राजुकमार फैसल मुसाद को शाह फैसल की हत्या का मुजरिम करार देते हुए फांसी दे दी गई.

राजुकमार को सार्वजनिक तौर पर राजधानी रियाज के चौराहे पर फांसी दी गई थी.

लेकिन राजकुमार ने उनकी हत्या क्यो की थी ये आज तक एक राज़ बना हुआ है.

कुछ लोगों का मानना है कि वो अपने बड़े भाई खालिद की मौत का बदला लेना चाहता था जो 1966 में सऊदी सुरक्षाकर्मियों के जरिए मारे गए थे.

कुछ दूसरे लोग इसे एक बड़े षडयंत्र के रूप में देखते हैं लेकिन जांच में पता चला कि राजकुमार फैसल मुसाद ने अकेले ही इस काम को अंजाम दिया था.

आधिकारिक तौर पर सऊदी हुकूमत ने राजकुमार फैसल मुसाद को मांसिक रूप से असंतुलित करार दिया था.

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