दुनिया भर में बीते साल 676 लोगों को मिला मृत्युदंड

Image caption साल 2010 के आखिर तक ऐसे लोगों की संख्या 18, 750 थी जिन्हें मौत की सजा सुनाई गई है

मौत की सजा एकदम खत्म करने की पुरजोर वकालत करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि साल 2011 में दुनिया के कम से कम 20 देशों में लोगों को मौत की सजा दी गई. इनमें नया बना देश दक्षिण सूडान भी शामिल है.

वहीं साल 2010 में मौत की सजा देने वाले मुल्कों की संख्या 23 थी. आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में मौत की सजा देने का चलन पहले के मुकाबले कम हो रहा है क्योंकि एक दशक पहले इन देशों की संख्या 31 थी.

एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि साल 2011 में पूरी दुनिया में कम से कम 676 लोगों को मौत की सजा दी गई. लेकिन इसमें उन लोगों की कोई गिनती नहीं है जिनके बारे में समझा जाता है कि उन्हें चीन में मौत की सजा मिली.

लेकिन इससे पिछले साल यानी वर्ष 2010 में कम से कम 527 लोगों को मौत की सजा दी गई थी. इसका मतलब ये निकाला जा सकता है कि मौत की सजा देने का चलन भले ही कम हुआ, लेकिन मौत की सजा के मामले बढ़े हैं.

पश्चिम एशियाई देशों में ज्यादा मामले

ईरान में अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने, पाकिस्तान में ईश-निंदा, सऊदी अरब में जादू-टोना करने, कांगो गणराज्य में इंसान की हड्डियों की तस्करी और अन्य दस देशों में मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों में मौत की सजा दी गई.

सजा के लिए जो तरीके अपनाए गए, उनमें सिर को धड़ से अलग करना, फांसी पर लटकाना, जहरीला इंजेक्शन देना और गोली मारकर मौत के घाट उतारना शामिल है.

साल 2010 के आखिर तक ऐसे लोगों की संख्या 18750 थी जिन्हें मौत की सजा सुनाई गई है.

मध्य पूर्व के देशों में मौत की सजा देने के मामले तेजी से बढ़े हैं.

इसकी वजह इस क्षेत्र के चार देश हैं जहां सबसे ज्यादा मामले सामने आए. इराक में कम से कम 68, ईरान में 360, सऊदी अरब में 82 और यमन में 41 लोगों को मौत की सजा दी गई.

एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि पश्चिमी लोकतांत्रिक देशों में अमरीका एकमात्र देश है जहां बीते साल 43 लोगों को मौत की सजा दी गई.

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