'सीरिया में छद्म युद्ध का खतरा'

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Image caption सद्दाम हुसैन के तख्तापलट के बाद बगदाद में इस तरह का कोई बड़ा सम्मेलन हो रहा है.

इराक के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने चेतावनी दी है सीरिया में दूसरे पक्ष को हथियार मुहैया कराने से देश में छद्म युद्ध की आशंका है.

सीरिया में बढ़ती हिंसक घटनाओं पर इराक में हो रहे अरब लीग सम्मेलन को संबोधित करते हुए इराकी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने ये बात कही.

सद्दाम हुसैन के तख्तापलट के बाद पिछले दो दशकों में पहली बार बगदाद में इस तरह का कोई बड़ा सम्मेलन हो रहा है.

इस सम्मेलन में सीरिया में साल भर से जारी हिंसा खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की योजना पर चर्चा हो रही है.

सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय दूत कोफ़ी अन्नान की ओर से तैयार संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग की संयुक्त योजना को स्वीकार करते हैं.

मगर साथ ही राष्ट्रपति असद ने कहा है कि सीरिया में मौजूद सशस्त्र गुटों को सरकार के विरुद्ध आतंकवादी कार्रवाई बंद करनी होगी.

गुरुवार को हुए संघर्ष में 20 लोगों की मौत हो गई.

इस बीच ब्रितानी सरकार ने सीरिया में विपक्षी गुटों के लिए सात लाख डॉलर के समर्थन की घोषणा की है.

बैठक की पूर्व संध्या पर अमरीका ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद पर आरोप लगाया था कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग की शांति योजना को मानने का वादा तोड़ दिया हैं.

कोफी अन्नान के नेतृत्व में बनी योजना के तहत संयु्कत राष्ट्र की निगरानी में संघर्ष खत्म होना था, सरकारी सेनाओं को विद्रोही शहरों से बाहर आना था और मानवीय संकट के हालत बेहतर किए जाने थे.

शांति योजना

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव और अरब लीग के विशेष दूत कोफी अन्नान ने जिस शांति योजना का प्रस्ताव तैयार किया है उसके तहत सभी पक्षों से हिंसा ख़त्म करने का आश्वासन शामिल है.

साथ ही योजना के तहत प्रतिदिन दो घंटे के युद्ध विराम को पालन करने का प्रावधान है जिससे हताहतों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा सके.

इस योजना में मीडिया को भी उन इलाकों में दाखिल होने का प्रावधान है जहाँ जहाँ लड़ाई जारी है.

इससे पहले सीरिया पर लाए गए प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में रूस और चीन दो बार वीटो कर चुके हैं जिसके लिए उनकी कड़ी आलोचना हुई थी.

सीरिया में जारी राजनीतिक हिंसा में अब तक नौ हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हिंसा को रोकने की सभी अंतरराष्ट्रीय कोशिशें अब तक नाकाम ही साबित हुई हैं.

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