आईफोन-आईपैड बनाने वाली फैक्ट्री में 'शोषण'

 शुक्रवार, 30 मार्च, 2012 को 17:30 IST तक के समाचार
एपल

फॉक्सकॉन फैक्ट्रियों में कर्मचारियों से असुरक्षित माहौल में लंबे समय तक काम करवाया जाता

एक स्वतंत्र जांच में पाया गया है कि चीन में एप्पल कंपनी के लिए आई फोन और आई पैड बनाने वाली फैक्ट्रियों में कर्मचारियों का 'शोषण' हो रहा है.

ये जांच एप्पल के कहने पर एक अमरीकी संस्था फेयर लेबर एसोसिएशन ने की है.

पहले ऐसी खबरें आई थीं कि एप्पल के लिए उत्पाद बनाने वाली चीनी कंपनी फॉक्सकॉन के फैक्ट्रियों में कर्मचारियों से असुरक्षित माहौल में लंबे समय तक काम कराया जाता है.

फेयर लेबर एसोसिएशन का कहना है कि उसने इन फैक्ट्रियों में कर्मचारियों के कार्य का समय कम करने, तनख्वाह बढ़ाने और कर्मचारियों की तादाद में इजाफा करने जैसे मुद्दों पर मुख्य कंपनी से सहमति प्राप्त कर ली है.

एप्पल ने कहा है कि वो फेयर लेबर एसोसिएशन के सभी सुझावों को मानता है.

सुधार के सुझाव

एप्पल के बयान में कहा गया, ''हम फेयर लेबर एसोसिएशन द्वारा दुनिया के हर कोने में स्थित फैक्ट्रियों में काम कर रहे कर्मचारियों और मज़दूरों के जीवन स्तर को बेहतर करने और मानकों को ऊंचा करने की कोशिश का समर्थन करते हैं.''

एप्पल कंपनी के सीईओ टिम कुक फॉक्सकॉन के फैक्ट्रियों के दौरे पर थे और इसी दौरान जांच रिपोर्ट को जारी किया गया.

कुक बुधवार को चीन के ज़ेगज़ाउ टेक्नोलॉजी पार्क में भी गए जहां एक लाख बीस हज़ार कर्मचारी काम करते हैं.

फॉक्सकॉन में पिछले साल एक के बाद एक हुई कई घटनाओं ने लोगों का ध्यान यहां की फैक्ट्रियों में काम करने वालों की स्थिति की तरफ खींचा था.

इसी के बाद पिछले महीने ही एप्पल ने फेयर लेबर एसोसिएशन के स्वतंत्र जांचकर्ताओं की टीम को हालात का जाएजा लेने के लिए फॉक्सकॉन की फैक्ट्रियों में भेजने की घोषणा की थी.

कानूनी हद

"फॉक्सकॉन द्वारा उठाया जा रहा ये कदम लंबे समय से प्रतिक्षित था. ये विकासशील देशों में घटिया हालात में सस्ते सामानों के उत्पादन की पुरानी समस्या को नए और पारदर्शी उपायों से सुलझाने का प्रयास है"

एडम ब्रूक्स, बीबीसी संवाददाता

ये जांच अब तक किसी भी अमरीकी कंपनी के देश के बाहर स्थित इकाइयों में जांच का सबसे बड़ा मामला है.

जांच के दौरान पाया गया कि इन फैक्ट्रियों में कई कर्मचारियों को तय मानक के विपरीत एक हफ्ते में साठ घंटे से भी ज़्यादा समय के लिए काम कराया जा रहा था. कई कर्मचारियों को साप्ताहिक छुट्टियां भी नहीं दी जा रही थी.

इसके अलावा कर्मचारियों को बिना किसी अतिरिक्त मेहनताने के ओवरटाइम करवाया जा रहा था. साथ ही फैक्ट्रियों में कर्मचारियों की सुरक्षा संबंधित कई मसले भी पाए गए.

कर्मचारियों का मासिक वेतन 360 से 455 अमरीकी डॉलर तय था जिसमें फॉक्सकॉन ने हाल ही में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है.

फेयर लेबर एसोसिएशन के अनुसार फॉक्सकॉन इस बात पर राजी हो गई है कि वो उनके मानकों के हिसाब से अपनी फैक्ट्रियों में काम के घंटों को जुलाई 2013 से बदल देगी.

चीन में एक हफ्ते में 49 घंटे काम करने का कानून है.

मज़दूर संगठनों की कमी

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक चीनी कंपनी अब इस समस्या को सुलझाने के लिए हज़ारों नए कर्मचारियों की भर्ती करेगी.

वॉशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता एडम ब्रूक्स के अनुसार, ''विकासशील देशों की फैक्ट्रियों में घटिया कार्य माहौल व्याप्त होने की इस पुरानी समस्या पर जांच प्रतिक्षित थी.''

हालांकि एडम ब्रूक्स के मुताबिक इस रिपोर्ट में गौर करने वाली बात ये है कि फॉक्सकॉन के कर्मचारियों की अपनी कोई ट्रेड यूनियन नहीं थी.

चीन में अधिकारी वर्ग मजदूर संगठनों से काफी सावधान रहते हैं और आगे भी हालात कमोबेश ऐसे ही रहेंगे.

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चीन में अधिकारी वर्ग मज़दूर संगठनों से काफी सावधान रहते हैं, और आगे भी ऐसा ही रहेगा

इस रिपोर्ट को जारी किए जाने से पहले वहां के मजदूर संगठनों ने फॉक्सकॉन कंपनी की अपने कर्मचारियों के प्रति प्रतिबद्धता पर शक जाहिर किया था.

मज़दूर संगठनों और उपभोक्ता समूहों की सम्मिलित संस्था समऑफअस डॉट ऑर्ग (SumOfUS.org) के अनुसार, ''ताजा रिपोर्ट के बाद एप्पल कुछ नए वादे करेगा जो उतने ही खोखले साबित होंगे जितना पिछले पांच साल में उनके द्वारा किए गए अन्य वायदे साबित हुए हैं.''

चीन में फॉक्सकॉन के बीस लाख से अधिक कर्मचारी हैं जो एप्पल के अलावा माइक्रोसॉफ्ट, ह्यूलेट-पैकर्ड और अन्य कंपनियों के लिए सामान बनाते हैं.

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