लाइबेरिया:जनसंख्या का एक प्रतिशत केवल उजाले में

 सोमवार, 2 अप्रैल, 2012 को 05:16 IST तक के समाचार
बिजली

बिजली की समस्या ने पश्चिमी अफ्रीका के इस छोटे शहर को दुनिया का अंधकारमेय देश बना दिया है.

लाइबेरिया में कई सालों तक चले गृह युद्ध के करीब एक दशक बाद भी वहां आबादी का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा बिजली का लाभ उठा सकता है.

इस समस्या ने पश्चिमी अफ्रीका के इस छोटे शहर को दुनिया का अंधकारमेय देश बना दिया है.

अंधेरे में जिंदगी गुजार रहे लाइबेरिया को उर्जा जरुरतों के लिए कोयले और लकड़ी पर निर्भर करना पड़ता है और जिनके पास पैसे होते है वो डीजल से चलने वाले जनरेटर का इस्तेमाल करते हैं.

वहां ये आकलन किया गया है कि बिजली की ग्रिड की सुविधा न होने के कारण वहां लोग अपनी आय का पचास फीसदी उर्जा जरुरतों को पूरा करने पर खर्च करते हैं.

लाइबेरिया की राष्ट्रपति एलेन जॉनसन सरलिफ ने बिजली की सप्लाई बहाल करने का लक्ष्य रखा है.

बीबीसी के संवाददाता तमासीन फोर्ड ने लाइबेरिया के क्लारा टॉउन का जायजा लिया और पाया कि वहां दिन छिपने के कुछ मिनटों बाद ही सेंट पॉल नदी के किनारे पर बसी बस्ती अधंकार में डूब जाती है.

लेकिन यहां शोरगुल वाले जनरेटरों के जरिए बड़े शहरों , बाजारों और उद्यमों में बिजली की चमक दिखाई देती है.यहां लोग अपनी गलियों में बाहर आकर पड़ोस से आ रही बिजली का फायदा उठाते हैं.

अंधकार

"हम लोग मोमबत्ती खरीदते हैं.इस टेबल पर ये मोमबत्ती रखी हैं और इसी का इस्तेमाल मेरे बच्चे होमवर्क करते वक्त करते हैं.''"

कान्नेह

इसी समस्या से जुझ रही मा कान्नेह कहती हैं, ''सारा शहर अंधकार में है.हम इस समस्या को झेल रहे हैं.हम केवल मोमबत्ती खरीद सकते हैं और इसी से अपना काम चला रहे हैं.''

मा कान्नेह एक खंडहर में तब्दील हो चुकी दिवार के पीछे खड़े होकर एक बड़े से बर्तन में चावल पकाती है और इन्हीं को बेचकर वो अपना घर चलाती है.

दो बच्चों की मां कान्नेह बिना खिड़की वाले भीड़ से भरे हुए घर के एक छोटे से कमरे में किराए पर रहती हैं .

जब उनसे पूछा गया कि उनके बच्चे होमवर्क कैसे करते हैं तो उनका कहना था,''हम लोग मोमबत्ती खरीदते हैं.इस टेबल पर ये मोमबत्ती रखी हैं और इसी का इस्तेमाल मेरे बच्चे होमवर्क करते वक्त करते हैं.''

गृह युद्ध के कारण क्लारा टॉउन में बिजली की ग्रिड, पानी की सप्लाई यहां तक की सड़क भी बर्बाद हो चुकी है.यहां पक्के बने घर और टिन से बनी हुई झोपड़ियों से कम उंचाई से तारे लटकी हुई नजर आती है और व्यावसायिक सोच वाले लोग जनरेटर से पैदा होने वाली बिजली को बेचते है.

जैसे ही यहां अंधेरा होता है अपराधियों का भी डर बढ़ जाता है.

अपराध

एम्मिटे कहते हैं,''यहां अपराध बहुत ज्यादा होता है.कभी रात में आप देख सकते है कि लोग दूसरों के घरों से सामान चोरी कर लेते हैं.यहां चोर हथियार के साथ घुमते रहते हैं और लोगों को परेशान करने की कोशिश करते है.''

सरलिफ

राष्ट्रपति ने कहा है कि उनका देश में बिजली की बहाली करना मुख्य मकसद है

एम्मिटे एक नाई है और वो खुशकिस्मत है क्योंकि उनके पास जनरेटर है.

वे कहते है कि अगर बिजली होगी तो अपराधी नहीं आएंगे और इससे इलाका भी सुरक्षित रहेगा.

गृह युद्ध से पहले मॉउंट कॉफी में पन बिजली संयंत्र हुआ करता था.ये राजधानी के बाहर था और लाइबेरिया को उर्जा देने का मुख्य स्रोत था.

लेकिन ये युद्ध के दौरान देश को उर्जा वितरण करने वाले नेटवर्क के साथ-साथ ये संयंत्र भी पूरी तरह से बर्बाद हो गया.

लाइबेरिया का इलेक्ट्रिसिटी कॉरपोरेशन जो ग्रिड को चलाता है उसे भी अब जनरेटर के जरिए चलाया जाता है.

कॉरपोरेशन में मुख्य प्रबंधक अधिकारी शाहीद मोहम्मद कहते हैं, '' डीजल बहुत मंहगा है इसलिए यहां बिजली की दर मंहगी ,शायद दुनिया में सबसे मंहगी.हमें किलोवाट प्रतिघंटा 54 सेंट देने पड़ रहे हैं जो कि बड़ा मंहगा है.यही हमारी मुख्य समस्या है.''

नया पन बिजली संयंत्र

लेकिन मोहम्मद के अनुसार अब कठिन समय बीत चुका है.अनका कहना है कि पन बिजली संयंत्र को दोबारा बनाने का काम इसी साल से शुरु हो रहा है.साथ ही आईवरी कोस्टी से सस्ती बिजली देने की भी योजना है.राष्ट्रपति सरलिफ या जिन्हें प्यार से मां एलेन नाम से भी पुकारा जाता है, ने अपने वार्षिक संदेश में इस बात पर जोर दिया था कि देश में जल्द ही बिजली बहाल की जाएगी.

राष्ट्रपति ने कहा था कि अगर हम चाहते है लाइबेरिया में हर व्यक्ति के लिए अर्थव्यवस्था काम करे तो हमें किफायती और सुलभ बिजली पैदा करनी होगी.

क्लारा टॉउन के लोगों को और जल्दी बिजली मिलेगी क्योंकि 21 निम्न आय वाले समुदाय को बिजली देने का काम शुरु हो चुका है.इसके लिए विश्व बैंक से बड़ी सहायता राशि दी गई है और इन समुदाय में क्लारा टॉउन भी शामिल है.

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