बिन माँ की बेटी, हाँ जी...

इमेज कॉपीरइट none
Image caption जोधपुर का उम्मेद हॉसिपटल जहाँ यह विवाद हुआ है

भारत में एक कन्या शिशु के माता-पिता उसे अपनाने को तैयार नहीं हैं, जबकि एक नवजात बालक पर हक़ जता रहे हैं.

जोधपुर के प्रमुख अस्पताल उम्मेद हॉस्पिटल में 25 मार्च को दो शिशुओं का जन्म हुआ जिसमें एक लड़का और एक लड़की थी. जिन महिलाओं ने इन बच्चों को जन्म दिया उनके नाम पूनम कंवर और रेशमी देवी हैं.

जोधपुर से स्थानीय पत्रकार त्रिभुवन ने बताया कि "पूनम कँवर ने बालिका को जन्म दिया था जबकि रेशमी देवी ने लड़के को, अस्पताल के कर्मचारियों ने दोनों महिलाओं को इसकी जानकारी देकर, उन्हें बच्चा दिखा दिया और उनके टैग भी लगा दिए, मगर रात के तकरीबन दो बजे अस्पताल के कर्मचारियों ने भूलवश पूनम कंवर को बालक और रेशमी देवी को बालिका दे दी, कुछ घंटे बाद जब उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ तो उन्होंने बच्चे सही अभिभावकों को सौंपे."

मगर इस घटना के बाद से पूनम कंवर अपनी बेटी को स्वीकार करने, यहाँ तक कि उसे दूध भी पिलाने को तैयार नहीं हैं, उनका कहना है कि उन्हें वही लड़का चाहिए जिसे उन्होंने दूध पिलाया है.

अस्पताल ने शुरूआत में रक्त परीक्षण के ज़रिए मामले को हल करने की कोशिश की थी लेकिन लड़का लेने पर अड़े दंपति ने उसके परिणाम को मानने से इनकार कर दिया.

बालिका अस्पताल की नर्सरी में पड़ी है जिसकी देखभाल उम्मेद हॉस्पिटल के कर्मचारी कर रहे हैं.

त्रिभुवन का कहना है कि डीएनए जाँच दिल्ली में होगी और रिपोर्ट के आने में एक महीने तक का समय लग सकता है तब तक नवजात बालिका अस्पताल की नर्सरी में पड़ी रहेगी.

रेशमी देवी ने लिखित वादा किया है कि अगर डीएनए जाँच में पाया गया कि उनकी संतान बेटी थी तो वे उसे अपनाने को तैयार हैं मगर पूनम कंवर ऐसा वादा करने को तैयार नहीं हैं.