एशिया-प्रशांत में 200 अमरीकी मरीन सैनिक पहुँचे

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Image caption ऑस्ट्रेलिया वायुसेना के एक हवाई अड्डे पर उतरते अमरीकी मरीन सैनिक

चीन की आपत्तियों के बावजूद, अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की घोषणा के बाद, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमरीकी मरीन सैनिकों की मौजूदगी बढ़ाते हुए मरीन सैनिकों का 200 सदस्यीय दल ऑस्ट्रेलिया पंहुच गया है.

ये मरीन सैनिक अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की उस योजना का हिस्सा हैं जिसके तहत वो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमरीकी सैन्य क्षमता को मजबूत करना चाहते हैं.

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 2500 मरीन सैनिकों की तैनाती की योजना है जिसमें पहले चरण में ये सैन्य दस्ता उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के डार्विन शहर में मंगलवार को पंहुचे.

ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री स्टीफन स्मिथ ने कहा कि मरीन सैनिकों की उपस्थिति चीन और भारत के सामरिक और राजनैतिक उदय के जवाब में एक कदम है.

सामाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड, रक्षा मंत्री स्टीफन स्मिथ, और उत्तरी क्षेत्र के मुख्यमंत्री पॉल हेंडरसन ने इस तैनाती का स्वागत किया और एक संयुक्त वक्तव्य में कहा कि इससे अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के 60 वर्षों से ज्यादा समय के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है.

चीन पर नजर

उन्होंने कहा, "अमरीका और ऑस्ट्रेलियाई के बीच मौजूदा सैन्य अभ्यास और अन्य कार्यक्रमों के लिए ये एक विकास का कदम है. हमारा इरादा आने वाले समय में उत्तरी क्षेत्र में 2500 मरीन एयर ग्राउंड टास्क फोर्स की तैनाती करना है. "

इससे पहले चीन के अधिकारियों ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि कहीं अमरीका का लक्ष्य चीन की बढ़ती शक्ति को रोकना तो नहीं है.

पिछले साल जब इस योजना की घोषणा की गई थी तब ऑस्ट्रेलियाई नेताओं ने कहा था कि ये कदम चीन को काबू में रखने के लिए नहीं उठाया गया है.

पिछले हफ्ते ऑस्ट्रेलिया ने कहा था कि वो अमरीका को अपनी जमीन पर जासूसी ड्रोन की तैनाती करने की अनुमति दे सकता है.

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