'अमरीका में भी बेशुमार गरीबी'

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Image caption मिसीसीपी में हाल ही में बाढ़ से भारी तबाही मची थी.

भारत में इन दिनों गरीबी रेखा को लेकर काफी विवाद मचा हुआ है लेकिन गरीबी सिर्फ भारत या दूसरे प्रगतिशील देशों की समस्या नहीं है.

अमरीका जैसे उन्नत देश में भी बेशुमार गरीबी है.

कहा जाता है कि मिसीसीपी अमरीका का सबसे गरीब राज्य है. यहां तक कि मिसीसीपी डेल्टा का जिक्र आते ही दिमाग में वहां रह रहे लोगों के मुश्किल जीवन का ख्याल आने लगता है.

अमरीका के एक जाने माने फोटोग्राफर अल क्लेटन ने जब 1967 में उस इलाके में रह रहे लोगों के जीवन को अपने कैमरे में कैद किया तो उनके पास कुपोषित बच्चों की तस्वीरों के अलावा शायद कुछ नहीं था.

लेकिन उनके जरिए खींची गई तस्वीरों की वजह से पूरे अमरीका का ध्यान उस क्षेत्र की खराब हालात की ओर गया.

लेकिन लगभग 45 वर्षों के बाद भी ताजे आंकड़े यही बताते है कि वहां के हालात में कोई खास बेहतरी नहीं हुई है.

बीबीसी वाशिंगटन संवाददाता पॉल एडम्स ने मिसीसीपी के बेलजोनी शहर का दौरा किया और वहां के लोगों के जीवन को करीब से देखने की कोशिश की.

पॉल एडम्स के साथ थे केनेथ डीन और फोटोग्राफर अल क्लेटन.

केनेथ डीन 1967 में क्लेटन के गाइड थे और अब पॉल एडम्स के गाइड हैं.

पॉल और केनेथ दोनों बेलजोनी शहर में रहने वाली कोरी रीड में के घर पहुंचते हैं. कोरी के दो कमरों के एक छोटे से घर में तीन लोग और सात बिल्लियां रहती हैं.

केनेथ ने जैसे ही कोरी को अल क्लेटन के जरिए खींची गई तस्वीरें दिखाई, कोरी ने उन्हें फौरन पहचान लिया.

1967 के अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए क्लेटन कहते हैं, ''उस समय हालात इतने दर्दनाक और निराशाजनक थे कि शब्दों के जरिए उनको बयान करना मुश्किल है. हजारों लोगों के पास खाने के लिए कुछ नहीं था. कोई काम नहीं था, कमाने का कोई साधन नहीं था. एक-एक दिन काटना बहुत मुश्किल था.''

'बदलाव'

लेकिन 40-45 वर्षों के बाद हालात में कुछ बदलाव तो हुआ ही है.

गरीब बच्चों को स्कूल में दाखिला लेने के लिए तैयारी कराने के लिए कई केंद्र खोले गए हैं.

इसे हेड स्टार्ट योजना कहा जाता है जिसे 60 के दशक में शुरू किया गया था.

इसके कार्यकारी निदेशक मार्विन हॉगन कहते हैं कि इससे कुछ फायदा तो हुआ है लेकिन हालात अभी भी गंभीर हैं.

इसके अलावा बेलजोनी में कुछ और सहायता कार्यक्रम भी चलाए जा रहें हैं. कंप्यूटर और नर्सिंग प्रशिक्षण केंद्र में नर्स की ट्रेनिंग ले रहे मार्कस डेनार्ड कहते हैं कि मिसीसीपी में जिंदगी बहुत मुश्किल है.

मार्कस के माता-पिता खेतों में काम करके अपना गुजर बसर करते थे लेकिन बाद में मशीनों के आ जाने के कारण वो आमदनी का वो जरिया भी खत्म हो गया.

'जिंदगी कठिन'

मार्कस कहते है, ''यहां जिंदगी बहुत कठिन है. नौजवानों के पास कुछ करने के लिए नहीं है, कोई नौकरी नहीं है. यहां यातायात के साधन भी अच्छे नहीं हैं कि हम दूसरे शहरों में जाकर नौकरी कर सकें.''

साठ के दशक में कृषि के क्षेत्र में नौकरियों के खत्म होने के बाद कैटफिश प्रोसेसिंग प्लांट में कुछ हद तक लोंगों को नौकरियां मिल जाती थीं.

लेकिन इस क्षेत्र में एशियाई देशों से मिल रही चुनौती के कारण अब ये उद्योग भी अवनति की ओर है.

कैटफिश प्रोड्यूसर्स के अध्यक्ष डिक स्टीवेंस कहते है कि मिसीसीपी डेल्टा फिर उसी पुराने जमाने की परेशानी और विपत्ति के दौर में जाने की कगार पर है.

केनेथ डीन का कहना है कि 60 के दशक के मुकाबले कई चीजें बदल गई हैं लेकिन खेती पर आधारित लोगों की सबसे बड़ी समस्या वहीं की वहीं है.

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