अमरीका: निहत्थों पर गोलीबारी, पांच पुलिसवालों को सजा

समुद्री तूफान 'कटरीना' के बाद गोलीबारी मामले के फ़ैसले आने से ख़ुश लोग इमेज कॉपीरइट AP
Image caption न्यू ऑरलींस में समुद्री तूफान कटरीना के बाद निहत्थे लोगों पर गोलीबारी के मामले में पांच पूर्व पुलिसकर्मियों को सजा

अमरीका में समुद्री तूफ़ान कैटरीना के बाद छह निहत्थे नागरिकों पर गोलियाँ चलाकर मार देने की घटना में पांच पूर्व पुलिस अधिकारियों को लंबे समय की जेल की सज़ा हुई है.

सितंबर 2005 में न्यू ऑरलींस शहर के डान्ज़िगर पुल पर हुई इस गोलीबारी में शामिल पूर्व पुलिसकर्मियों की सज़ा की मियाद छह से 65 साल के बीच है.

चार पुलिसकर्मियों को हथियार-संबंधी अपराधों का और पांचवे को घटना को छिपाने में मदद करने का दोषी पाया गया.

वर्ष 2005 में 29 अगस्त को आए समुद्री तूफ़ान कैटरीना से न्यू ऑरलींस शहर के बुरे रखरखाव वाले बांध तबाह हो गए थे जिससे लगभग सारे शहर में बाढ़ आ गई थी और हज़ारों लोगों को छतों पर चढ़कर जान बचानी पड़ी थी. इसमें लगभग 1800 लोग मारे गए थे.

झूठे गवाह, झूठी रिपोर्ट

इन अधिकारियों ने गोलीबारी को उचित ठहराने के लिए हादसे वाली जगह पर बंदूक रखी, झूठे गवाह और झूठी रिपोर्ट तैयार की.

सबसे लंबी सज़ा 48-वर्षीय रॉबर्ट फ़ॉलकन की है जिन्हें 65 साल की कै़द हुई है. कैनेथ बोएन और रॉबर्ट जिसेवियस को 40-40 साल और एंथनी विलावासो को 38 साल की जेल की सज़ा मिली है.

रिटायर्ड सार्जंट अर्थर कॉफ़मैन, जिन्हें घटना की जांच सौंपी गई थी, उन्हें इसे छिपाने के जुर्म में छह साल की कै़द हुई है.

पांच साल का समय लगा

फ़ॉलकन, बोएन, जिसेवियस और विलावासो उन दर्जन भर पुलिस अधिकारियों में से थे जिन्हें 4 सितंबर 2005 को रेडियो संदेश मिला कि डान्ज़िगर पुल के नज़दीक पुलिस पर गोलियां चलाई जा रही हैं.

इन चारों ने घटनास्थल पर पहुंच कर पुल पर चल रहे एक निहत्थे परिवार और घटनास्थल से भाग रहे एक व्यक्ति पर राइफ़लों और एक शॉटगन से गोलीबारी की.

इस गोलीबारी में न्यू ऑरलींस का एक जोड़ा, उनकी बेटी और भतीजा घायल हो गए जबकि उनके पारिवारिक दोस्त, 17-वर्षीय जेम्स ब्रिसेट की मौत हो गई.

इसके अलावा घटनास्थल से भाग रहे शारीरिक और मानसिक विकलांगता वाले 40-वर्षीय रोनाल्ड मैडिसन की भी पुल पर मृत्यु हो गई. उन्हें पीछे से शॉटगन से गोली मारी गई थी.

लेकिन अभियुक्त पुलिस अधिकारियों ने अपनी रिपोर्टों में दावा किया था कि उन्होंने पीड़ितों के पास हथियार देखे और उनके द्वारा धमकी दिए जाने के बाद ही पुलिसवालों ने गोलियां दागी.

पुल पर असल में क्या हुआ था, इस पूरे घटनाक्रम को साबित करने में पांच साल का समय लगा.

फ़ैसला आने के वक्त अर्थर कॉफ़मैन के अलावा बाकी सभी पुलिस अधिकारी पहले से ही जेल में थे.

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