व्हाइट हाउस में दो भारतीयों का सम्मान

Image caption निधि चनानी कहती हैं कि भारतीय मूल के अमरीकी कलाकार बहुत कम हैं

भारतीय मूल की दो अमरीकी महिलाओं को समाज में बेहतर बदलाव लाने की दिशा में काम करने के लिए व्हाइट हाउस ने सम्मानित किया है.

इन महिलाओं के नाम निधी चनानी और सुमा रेडडी हैं जिन्हें 'चैम्पियंस ऑफ चेंज' या बदलाव लाने वाले चैंपियन नामक कार्यक्रम के तहत सम्मानित किया गया है.

निधी चनानी एक कलाकार हैं. उन्होंने चित्रकला के ज़रिए अपने समुदाए और इलाके में बदलाव के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया है.

वहीं सुमा रेडडी एक समलैंगिक कार्यकर्ता हैं. उन्हें अपने इलाके में समलैंगिक लोगों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और उन्हें बेहतर तरीके से समझने के लिए किए गए काम के लिए सम्मानित किया गया है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चैम्पियंस ऑफ चेंज नामक कार्यक्रम की वर्ष 2011 में शुरूआत की थी जिसमें शिक्षा, कला और व्यापार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को सम्मानित किया जाता है.

एशियाई और प्रशांत द्वीप मूल के 10 लोगों को सम्मानित करने के लिए गुरूवार को व्हाइट हाउस में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था.

अमरीका में भारतीय आवाज

इस मौके पर ओबामा प्रशासन में जनसंपर्क विभाग के निदेशक जॉन कार्सन ने कहा, ''इन 10 चैंपियनों ने ये दिखा दिया है कि अपने इलाकों में बदलाव लाने और प्रेरणा के स्रोत बनने का क्या अर्थ होता है. इन्ही लोगों के काम की वजह से अमरीका में रहने वाले एशियाई और प्रशांत द्वीप का क्षेत्रीय समुदाए इतना मज़बूत हुआ है.''

वे कहते हैं, ''इनकी मदद से ही हमें पिछड़े हुए लोगों की मदद करने का मौका मिलेगा. इन्होंने जो काम किया है, उसके लिए इन्हें सम्मानित किया जा रहा है. हम व्हाइट हाउस में इनका स्वागत करते हैं.''

'चैम्पियंस ऑफ चेंज' के लिए चुने जाने के लिए व्हाइट हाउस ने व्हाट्स योर स्टोरी नामक एक प्रतियोगिता रखी थी जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों से अपने काम और अपने बारे में वीडियो भेजने को कहा गया था.

इसके बाद करीब 200 लोगों ने इस प्रतियोगिता के लिए आवेदन भेजा था जिनमें से 10 को चैंपियन चुना गया.

सेन फ़्रांसिस्को शहर में रहने वाली भारतीय मूल की पेंटर और डिज़ाइनर निधी चनानी अपनी कला के ज़रिए अपने समुदाए और इलाके में विविधता को दर्शाती हैं और लोगों को प्रोत्साहित करती हैं कि कला के ज़रिए भी अपनी आवाज़ उठाई जा सकती है.

निधी बताती हैं कि वो विभिन्न प्रकार की तस्वीरों के ज़रिए लोगों के जीवन के आम क्षणों को दर्शाती हैं. इनमें अधिकतर दक्षिण एशियाई मूल के और श्वेत लोगों के अमरीका में एक साथ जीवन बिताने के पलों और उनके रिश्तों को दर्शाया गया है.

निधी के पति एक श्वेत अमरीकी हैं. वे कहती हैं कि उनकी कला के प्रशंसक सभी नस्ल और धर्म के हैं.

लेकिन भारतीय मूल की महिला होने के नाते उन्हें चित्रकारी को एक करियर के रूप में अपनाने में मुश्किल हुई थी.

वे कहती हैं, ''शुरू में मेरे परिवार वाले इस करियर को लेकर खासे परेशान थे कि पता नहीं सही है या नहीं, इससे कुछ आर्थिक लाभ भी होगा या नहीं, लेकिन अब उन्हें मुझ पर फ़क्र है.''

निधी बताती हैं कि उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भी एक पेंटिंग बनाई है जिसमें उन्हें अपने परिवार के साथ दिखाया गया है. उन्होंने यह पेंटिंग राष्ट्रपति बराक ओबामा को भेंट कर दी है.

निधी चनानी कोलकाता में पैदा हुई थीं और जब बहुत छोटी थीं, तभी उनका परिवार अमरीका के कैलीफ़ोर्निया राज्य में बस गया था. उन्होंने सेन फ़ैंसिस्को शहर में अकेडेमी ऑफ़ ऑर्टस में कला की पढाई की. उसके बाद उन्होंने कलाकार के तौर पर कई तस्वीरें बनाईं जो शहर के विभिन्न स्थलों पर लगी हुई हैं.

समलैंगिक होने का एलान

Image caption निधि कहती हैं कि भारतीय मूल की महिला होने के नाते उन्हें चित्रकारी को एक करियर के रूप में अपनाने में मुश्किल हुई

सुमा रेडडी ने एमबीए किया है और वे कई वित्तीय संस्थानों में और विकास के क्षेत्रों में काम कर चुकी हैं.

वे न्यूयॉर्क में दक्षिण एशियाई समलैंगिक संस्था की कार्यकर्ता भी हैं और समलैंगिक लोगों के प्रति रवैये को सुधारने के मकसद से उनके बारे में आम लोगों में जानकारी बढ़ाने का भी काम करती हैं.

इसी काम के लिए उन्हें व्हाइट हाउस में सम्मानित किया गया.

सुमा रेडडी कहती हैं कि एक दक्षिण एशियाई के तौर पर समलैंगिक होने का एलान करना, उनके लिए काफ़ी चुनौतीपूर्ण था.

वे कहती हैं, ''जब मैं न्यूयॉर्क में रहने आई तो मैं किसी दक्षिण एशियाई समलैंगिक को नहीं जानती थी. लेकिन जब मुझे न्यूयॉर्क की दक्षिण एशियाई समलैंगिक संस्था का पता चला तो मैंने उसके साथ काम करना शुरू किया. उसके ज़रिए मैं बहुत से डॉक्टर, वकील, इंजीनियर और वित्त क्षेत्र में काम करने वाले लोगों से मिली जो कार्यकर्ता की तरह भी काम करते थे. उसने मुझे बहुत बल मिला.''

अमरीका में करीब डेढ़ करोड़ एशियाई मूल के अमरीकी रहते हैं. इनमें से 27 लाख के करीब भारतीय मूल के अमरीकी, साढ़े तीन लाख पाकिस्तानी अमरीकी हैं और करीब एक लाख बंग्लादेशी अमरीकी हैं.

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