संयुक्त राष्ट्र ने की सीरिया की कड़ी आलोचना

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Image caption होम्स और अन्य इलाकों में हिंसा कम होने के बजाए बढ़ गई है

समझौते के बावजूद हिंसा की ताजा घटनाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सीरिया की सरकार की भर्त्सना की है.

बान की मून का कहना है कि संघर्ष-विराम की दस अप्रैल की सीमा 'इसका बहाना नहीं हो सकती कि राष्ट्रपति बशर अल असद की वफादार सेनाएं लोगों की हत्या करना जारी रखें.'

सरकार विरोधी कार्यकर्ताओं का कहना है कि बीते दो दिनों में कम से कम सौ लोग मारे गए हैं क्योंकि सैनिकों ने अपना अभियान तेज कर दिया है.

शरणार्थियों की समस्या

इससे पहले, तुर्की ने कहा कि सीरियाई शरणार्थियों की बढ़ती संख्या की वजह से उसे संयुक्त राष्ट्र की मदद की जरूरत पड़ सकती है.

बान की मून से बात करने के बाद तुर्की के विदेश मंत्री अहमद दावुतोग्लू ने कहा कि जबसे बशर अल असद संयुक्त राष्ट्र-अरब लीग योजना को लागू करने पर राजी हुए हैं, तभी से तुर्की आने वाले शरणार्थियों की संख्या दोगुनी हो गई है.

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान की मध्यस्थता में जो छह सूत्री शांति योजना तैयार की गई है, उसके मुताबिक 12 अप्रैल से संघर्ष-विराम पूरी तरह से लागू हो जाएगा.

लेकिन सीरिया के विपक्ष, अमरीका और कई अन्य देशों ने राष्ट्रपति बशर अल असद की प्रतिबद्धता पर संदेह जताया है.

बेरूत स्थित बीबीसी संवाददाता जिम मुइर का कहना है कि होम्स और अन्य इलाकों में हिंसा कम होने के बजाए बढ़ गई है. उनका कहना है कि सरकार विरोधी कार्यकर्ता, सरकार पर पूरी तरह दमन करने का आरोप लगा रहे हैं.

लेकिन सरकारी अधिकारियों का कहना है कि विद्रोही लड़ाके उन कस्बों और शहरों में फायदा उठा रहे हैं जहां से सेना को वापस बुलाया जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र का एक दल दमिश्क में मौजूद है जो वहां संघर्ष विराम की निगरानी के लिए एक खास दल को तैनात किए जाने की संभावना पर चर्चा कर रहा है.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों और दमन कार्रवाई में साल भर में 9000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

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