आपदा प्रबंधन में सहायता के लिए नई तैयारी

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption प्राकृतिक आपदाओं में राहत और बचाव कार्य में देरी की वजह से मरने वालों की संख्या बढ़ जाती है

ब्रिटेन की सरकार का अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में राहत और बचाव कार्य के लिए इस हफ्ते एक नए कोष की घोषणा करने वाला है.

इस कोष के जरिए उन लोगों को अपने परिवारों से मिलाने में मदद की जाएगी जो प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अपने परिवार से बिछड़कर लापता हो जाते है.

इतना ही नहीं, जरूरत के हिसाब से नक्शे तैयार करने के लिए इसके तहत सैटेलाइटों का भी इस्तेमाल किया जाएगा.

इस कोष की मदद से जरूरत पड़ने पर झटपट रेडियो स्टेशन और मोबाइल नेटवर्क तैयार किया जाएगा.

कोष की स्थापना की वजह वो पूर्वानुमान हैं जिनमें कहा गया है कि वर्ष 2015 तक प्राकृतिक आपदाओं की वजह से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 37.5 करोड़ हो जाएगी.

भारत का मामला

भारत में भी भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात, सूनामी, हिमस्लखलन और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से लोग मारे जाते रहे हैं.

गुजरात में 26 जनवरी 2001 को आए शक्तिशाली भूंकप में कम से कम तीस हज़ार लोग मारे गए थे और क़रीब 10 लाख लोग बेघर हो गए.

हिंद महासागर में 26 दिसंबर 2004 को उठी सुनामी की लहरों से हजारों परिवारों को बेघर कर दिया था और बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे.

भारतीय पूर्वोत्तर क्षेत्रों में बीते साल सितम्बर में आए भूकंप ने सिक्किम में सबसे ज़्यादा तबाही मचाई थी जहां करीब 100 लोग मारे गए थे.

इसी जरूरत को देखते हुए भारत में भी आपदा प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

बीबीसी के अंतरराष्ट्रीय विकास संवाददाता डेविड लायन का कहना है कि भूकंप जैसी किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सैटेलाइट तस्वीरों की जरिए राहत और बचावकर्ता जरूरतमंद लोगों तक जल्द पहुंच सकेंगे.

उनका कहना है कि 21वीं सदी की इस तरह की तकनीक को सरकार आर्थिक मदद के जरिए बढ़ावा देना चाहती है.

संबंधित समाचार