टाइटैनिक जहाज के दस्तावेज इंटरनेट पर उपलब्ध

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ग्यारह ऑस्कर पुरस्कार जीतने वाली फ़िल्म टाइटैनिक की कहानी जिस त्रासदी पर आधारित थी, उससे संबंधित दस्तावेज अब इंटरनेट पर उपलब्ध करा दिए गए हैं.

इस 15 अप्रैल को टाइटैनिक जहाज को डूबे सौ साल पूरे हो जाएँगे.

इन दस्तावेज़ों से जहाज़ के साथ डूब कर मारे गए लोगों और किसी तरह बच गए 1,500 लोगों के बारे में काफ़ी जानकारियाँ मिलती हैं.

इनमें कई वसीयतें और फाइलें भी शामिल हैं.

ये दस्तावेज पारिवारिक इतिहास को समर्पित एक वेबसाइट www.ancestry.co.uk ने इकट्ठे किए हैं.

त्रासद यात्रा

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Image caption कप्तान एडवर्ड जॉन स्मिथ की वसीयत भी अब उपलब्ध है.

अलबत्ता इस वेबसाइट को पैसे देकर ही देखा जा सकता है लेकिन 31 मई 2012 तक टाइटैनिक संबंधी सभी दस्तावेज़ मुफ़्त देखे जा सकते हैं.

टाइटैनिक जहाज़ उत्तरी आयरलैंड के बेलफ़ास्ट शहर में बनाया गया था और ये न्यूयॉर्क के लिए अपनी पहली ही यात्रा के दौरान एक हिमखंड से टकराने के बाद अटलांटिक महासागर में डूब गया था.

वेबसाइट पर जारी किए गए दस्तावेज़ों में जहाज़ पर सफर कर रहे यात्रियों की आधिकारिक सूची भी शामिल है.

इससे यात्रियों के नाम, उम्र और पेशे का पता चलता है.

इसके अलावा इन कागजात में जहाज के चालक दल के 900 सदस्यों के बारे में भी कई दिलचस्प जानकारियाँ हैं.

जिन लोगों ने टाइटैनिक फ़िल्म देखी है, उन्हें याद होगा कि किस तरह जहाज़ के कप्तान ने मौत को सामने देखने के बावजूद जहाज़ नहीं छोड़ा.

वसीयतें और इतिहास

कप्तान एडवर्ड जे स्मिथ की वसीयत और गवाही के कागज भी इंटरनेट पर उपलब्ध दस्तावेज़ों में शामिल हैं.

इसके अलावा फ़िल्म में दिखाए गए अमरीकी अमीर बेंजामिन गगेनहेम और जॉन जेकब एस्टर की वसीयतें भी मौजूद हैं.

अब सभी लोग उन 330 मृतकों के बारे में भी जानकारी पा सकते हैं जिनके शवों को समुद्र से बरामद किया गया था.

इस वेबसाइट में उस बचाव नौका कारपाथिया की भी जानकारी है जिसके ज़रिए 700 लोगों को टाइटैनिक से सुरक्षित निकाला गया था.

वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के लिए ज़िम्मेदार मरियम सिल्वरमैन ने प्रेस एसोसिएशन को बताया, “कई परिवारों में पीढ़ियों से ये अफवाहें चलती आ रही हैं कि उनके परिवार के किसी सदस्य ने टाइटैनिक में यात्रा की थी लेकिन उसका सबूत खो गया है. हमें ख़ुशी है कि हम अब ये सबूत मुफ़्त उपलब्ध करवाने में सक्षम हैं ताकि हज़ारों लोग अपने पुरखों की इस दुखांत यात्रा की कहानी जान सकें.”

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